केेंद्र द्वारा बनाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसान 'दिल्ली कूच' पर निकले हैं। उन्हें दिल्ली-हरियाणा सीमा पर रोका गया तो बवाल शुरू हो गया है। किसान डटे हुए हैं और वह आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। आइये जानते हैं उन तीन कृषि कानूनों के बारे में जिनका विरोध हो रहा है:
इस कानून में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान है। ऐसा माना जा रहा है कि कानून के प्रावधानों से किसानों को सही मूल्य मिल सकेगा क्योंकि बाजार में स्पर्धा बढ़ेगी। बता दें कि साल 1955 के इस कानून में संशोधन किया गया है।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए, उनके उत्पादन, सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित रखना है। बता दें कि समय-समय पर आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट में कई चीजों को जोड़ा जाता रहा है। जैसे कि कोरोना काल में मास्क, सैनिटाइजर को आवश्यक वस्तुओं में जोड़ा गया है।
क्यों हो रहा है विरोध?
किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानून के लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुकसान किसानों को होगा। नए बिल के मुताबिक, सरकार आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर अति-असाधारण परिस्थिति में ही नियंत्रण लगाएंगी। ये स्थितियां अकाल, युद्ध, कीमतों में अप्रत्याशित उछाल या फिर गंभीर प्राकृतिक आपदा हो सकती है।
नए कानून में उल्लेख है कि इन चीजों और कृषि उत्पाद की जमाखोरी पर कीमतों के आधार पर एक्शन लिया जाएगा। सरकार इसके लिए तब आदेश जारी करेगी जब सब्जियों और फलों की कीमत 100 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी। या फिर खराब ना होने वाले खाद्यान्नों की कीमत में 50 फीसदी तक का इजाफा होगा।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसल की निश्चित कीमत दिलवाना है। इसके तहत कोई किसान फसल उगाने से पहले ही किसी व्यापारी से समझौता कर सकता है, इस समझौते में फसल की कीमत, फसल की गुणवत्ता और कितनी मात्रा में और कैसे खाद का इस्तेमाल होगा जैसी बातें शामिल हैं।
कानून के मुताबिक किसान को फसल की डिलिवरी के समय ही दो तिहाई राशि का भुगतान करना होगा और बाकी का पैसा 30 दिन के अंदर करना होगा। इसमें यह प्रावधान भी है कि खेत से फसल उठाने की जिम्मेदारी व्यापारी की होगी, अगर कोई एक पक्ष समझौते को तोड़ेगा तो उस पर पेनल्टी लगाई जाएगी।
ये कानून कृषि उत्पादों की बिक्री, फार्म सेवाओं, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जुड़ने के लिए सशक्त करता है।