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किसान नेताओं ने कहा, 'हम कोई समिति नहीं चाहते, बाकी सदस्य भी अलग हों'

Fri, 15 Jan 2021 05:26 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट की समिति से भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान के अलग होने का प्रदर्शनकारी किसानों ने स्वागत किया है। किसान नेताओं ने कहा, हम कोई समिति नहीं चाहते हैं और तीनों कानूनों को रद्द किए जाने से कम हमें कुछ भी मंजूर नहीं है।

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किसान नेताओं ने कहा, समिति के तीन अन्य सदस्यों को भी इससे अलग हो जाना चाहिए। किसानों ने कहा, प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों पर किसानों और केंद्र के बीच गतिरोध को सुलझाने के लिए किसी समिति के गठन की मांग ही नहीं की थी। वहीं, कुछ नेताओं ने मान को कानूनों के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने का न्योता भी दिया।

किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने समिति के सदस्यों को लेकर आशंका जाहिर करते हुए कहा था कि इसके सदस्य पूर्व में तीनों कानूनों की पैरवी कर चुके हैं। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, मान का फैसला अच्छा कदम है, क्योंकि किसान यूनियनों के लिए किसी भी समिति की कोई अहमियत नहीं है, क्योंकि संगठनों ने कभी इसकी मांग ही नहीं की थी। मान जानते हैं कि कोई भी किसान संगठन समिति के सामने पेश नहीं होगा, इसलिए उन्होंने यह निर्णय किया है। प्रदर्शन कर रहे करीब 40 किसान संगठनों के प्रधान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य चढूनी ने कहा, समिति के बाकी तीन सदस्यों के अलग हो जाने और नए सदस्यों की नियुक्ति के बावजूद किसान नेता समिति के सामने पेश नहीं होंगे। किसानों को तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने के सिवा कुछ और मंजूर नहीं है।
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टिकैत बोले, अब हमारे आंदोलन से जुडे़ं मान
एक और किसान नेता अभिमन्यु कोहार ने कहा, सरकार जानती है कि अदालत कानूनों को निरस्त नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, सरकार को किसानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना बंद कर देना चाहिए। किसान 28 नवंबर से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी मान के निर्णय का स्वागत किया और उन्हें तीनों कानूनों के खिलाफ आंदोलन में जुड़ने का न्योता दिया। भाकियू (एकता उगराहां) के पंजाब महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा, सरकार अगर तीनों कानूनों को वापस ले तो वह किसी भी समिति को स्वीकार लेंगे। किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने भी कहा, तीनों कानूनों को वापस लिए जाने तथा फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दिए जाने तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

मान ने समिति से खुद को किया अलग, कहा- किसानों के साथ खड़ा रहूंगा
तीनों कृषि कानूनों पर किसानों और सरकार के बीच गतिरोध के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट की बनाई गई चार सदस्यीय समिति से भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने अपना नाम वापस ले लिया है। उन्होंने बयान जारी कहा कहा, मैं किसानों के साथ हूं। मान के अलग होने के बाद समिति में अब तीन सदस्य बचे हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के डॉ प्रमोद कुमार जोशी, कृषि अर्थशास्त्री व कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुलाटी, शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट शामिल हैं।

मान ने बयान में कहा, 'मैं सुप्रीम कोर्ट का आभारी हूं कि उसने मुझे तीनों कृषि कानूनों पर किसान यूनियनों से बातचीत के लिए चार सदस्यीय समिति में चुना। एक किसान और यूनियन नेता होने के नाते किसान यूनियनों के बीच आशंकाओं और भावनाओं को देखते हुए मैं किसी भी पद का बलिदान करने को तैयार हूं। मैं पंजाब और देश के किसानों के हितों से समझौता नहीं कर सकता, इसलिए मैं इस समिति से खुद को अलग कर रहा हूं और मैं हमेशा पंजाब और किसानों के साथ खड़ा रहूंगा।'

दिसंबर में चिट्ठी लिखकर किया था कानूनाें का समर्थन
मान ने दिसंबर में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को एक खत लिखकर कुछ मांगें सामने रखी थीं। उन्होंने लिखा था, 'हम उन कानूनों के पक्ष में सरकार का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं। हम जानते हैं कि उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में एवं विशेषकर दिल्ली में जारी किसान आंदोलन में शामिल कुछ तत्व इन कृषि कानूनों के बारे में किसानों में गलतफहमियां पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।'

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