विज्ञान भवन 30 दिसंबर को केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच सातवें दौर की वार्ता का अखाड़ा बनने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार अपनी तो किसान नेता अपनी तैयारी कर रहे हैं। दोनों तरफ की कोशिश अपना-अपना झंडा बुलंद रखने की ही है।
29 दिसंबर को इसके बाबत केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल समेत अन्य के साथ होमवर्क किया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी जानकारी ली। सहयोगी केंद्रीय मंत्री पीयुष गोयल से चर्चा के बाद दोनों लोग केंद्रीय गृह सचिव अमित शाह के पास गए। वहां भी कल होने वाली बातचीत पर चर्चा हुई। इस तरह से केंद्र सरकार सातवें दौर में ठोस एजेंडे के साथ आने की तैयारी कर रही है।
यही स्थिति सिंघु बार्ड की भी है। किसान नेता भी लगातार सातवें दौर की वार्ता को लेकर चर्चा कर रहे हैं। केंद्र सरकार के वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद 28 दिसंबर को किसान नेताओं को वार्ता के एजेंडे का बेसब्री से इंतजार था। किसान नेता हरमीत सिंह कादियान का कहना है कि किसान तो अपने हित की मांग लेकर आया है। आखिर वह केंद्र सरकार के चर्चा के प्रस्ताव से भाग कैसे सकता है? बशर्ते सरकार ठोस इरादे से आए।
किसान नेता शिवकुमार कक्का ने कहा कि किसानों के बातचीत में शामिल नहीं होने का सरकार भ्रम फैला रही है। इसलिए बातचीत में शामिल होने जा रहे हैं। हालांकि कक्का को लग रहा है कि सातवें दौर में भी सरकार घुमा-फिराकर पुरानी बातें ही कर सकती है। जबकि किसान इस सोच के साथ जा रहे हैं उनकी मांगों को मानने की दिशा में सरकार वार्ता करेगी। किसानों के अन्य प्रतिनिधियों में राजेवाल, लखूवाल गुट समेत सभी ने आगे की रणनीति पर चर्चा की। किसान सातवें दौर की वार्ता के लिए ठोस रणनीति बनाकर जा रहे हैं।
सबकी निगाह 30 दिसंबर पर टिकी
किसान संगठनों के नेताओं के साथ गाजीपुर बार्डर पर जमा किसानों की निगाह भी 30 सितंबर की वार्ता पर टिकी है। किसान नेता वीएम सिंह को भी वार्ता से काफी उम्मीद है। वीएम सिंह का कहना है कि सरकार यदि किसानों को गंभीरता से सुनने के इरादे से आएगी तो जरूर रास्ता निकल सकता है। वह कहते हैं कि बीच का रास्ता सबसे अच्छा रहेगा। जहां किसानों का सम्मान बना रहे और सरकार की नाक भी। इसके लिए जरूरी है कि केंद्र सरकार एमएसपी की बजाय एमएसपी पर खरीद की गारंटी दे दे। भारतीय किसान यूनियन के नेताओं का कहना है कि ठोस इरादे से आए हैं। जब तक सरकार हमारी मांग नहीं मानती, किसान आंदोलन जारी रहेगा। एक जनवरी को ट्रैक्टर रैली भी प्रस्तावित है।
दोनों का एक दूसरे पर आरोप
किसान नेता जहां केंद्र सरकार पर केवल दिखावे के लिए बातचीत करने और किसानों से बातचीत को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान आंदोलन को झूठ की दीवार बताया। उन्होंने 28 फरवरी को कहा कि तीनों कानूनों को लेकर किसानों के बीच में भ्रम फैलाया गया और किसानों को सच्चाई समझ में आने पर यह झूठ की दीवार गिर जाएगी।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष से लेकर केंद्र सरकार अन्य मंत्रियों ने भी इसी तरह के वक्तव्य दिए हैं। दूसरी तरफ देश के तमाम संगठनों, क्षेत्रों से केन्द्र सरकार पर किसानों से वार्ता करने का दबाव बढ़ रहा है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार को जब किसान आंदोलन झूठ की दीवार लग रही है, तो फिर सरकार बातचीत क्यों कर रही है? हरमीत सिंह कादियान कहते हैं कि तीनों कानूनों में कुछ संशोधनों का सरकार ने प्रस्ताव क्यों दे दिया? सही बात तो यह है कि सरकार किसानों की समस्या और मांग का समाधान कम और किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश ज्यादा कर रही है।