किसानों का अन्नदाता कहा जाता है, और यह अन्नदाता हमेशा अपने कर्तव्यों को निभाने की पूरी कोशिश करता रहता है। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला शिवामोग्गा के टीपू नगर में जहां 62 साल के सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद अनवर खादरी ने मुस्लिमों के लिए सामूहिक विवाह का आयोजन किया।
शादी समारोह की सबसे खास बात यह रही कि खादरी ने अपनी बेटी का निकाह भी इसी आयोजन में करवाया। 24 अप्रैल को हुए इस शादी समारोह को कर्नाटक में अब तक के हुए सबसे बड़े समारोह में से एक माना जा रहा है। जिसमें 163 जोड़े शादी के पवित्र बंधन में बंध गए।
एक मामूली कृषक और छोटे से लकड़ी के यार्ड के मालिक अनवर ने अपना आरामदायक काम धंधा दो दशक पहले ही छोड़ दिया था और अपने बाबा से किया वादा निभाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता बन गए।
खादरी बताते हैं कि आज से लगभग 15 साल पहले वो हज़रत कलंदर शाह पीर बाबा की मजार पर थे जहां लाखों श्रद्धालु दूसरे देशों से आए हुए थे। खादरी बोले- मैं वहां लगभग एक महीने एक श्रद्धालु और कार्यकर्ता के रूप में ठहरा रहा। एक दिन बाबा ने मुझसे व्यक्तिगत रूप से कहा कि मैं शपथ लूं कि आज के बाद बिना किसी भेदभाव के गरीबों के आंसू पोछने का काम करूंगा। आज मैं सामूहिक शादी समारोह कराकर बाबा को दिया हुआ वचन पूरा कर रहा हूं।
खादरी के अंदर शादी करवाने का विचार तब आया जब वो शिवागोम्मा वापस आ रहे थे और उन्होंने देखा कि एक गरीब अपनी बेटी की शादी करवाने के लिए भीख मांग कर पैसे इकठ्ठे कर रहा था। खादरी ने बाबा को दिए हुए वचन को याद किया और उस लड़की की शादी के लिए पैसे दे दिए। तब से मैंने कभी पीछे मुड़ के वापस नहीं देखा।
खादरी कहते हैं कि नवंबर या दिसम्बर में वो 600 जोडों की शादी करवाने की योजना बना रहे हैं। खादरी एक एसोसिएशन चला रहे हैं जिसका नाम खालांद्रिया है, जिसमें धनी लोगों को जोड़ा गया है और लगभग दो हजार के करीब इसमें सदस्य हैं।