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MSP पर रार: पीएम मोदी के सामने फिर मुश्किल खड़ी करेंगे किसान, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर एक और बड़े आंदोलन की तैयारी

अमित शर्मा
Updated Tue, 15 Mar 2022 05:32 PM IST

सार

किसान नेता डॉ. आशीष मित्तल ने अमर उजाला से कहा कि यदि मार्च तक एमएसपी पर कमेटी का गठन नहीं किया जाता है तो किसान एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। किसान पूरे देश में 11-17 अप्रैल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बड़ा आंदोलन करेंगे। यदि इसके पहले केंद्र सरकार कमेटी के गठन पर कोई ठोस निर्णय ले लेती है तो इस कार्यक्रम का स्वरूप बदल जाएगा...
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किसान आंदोलन - फोटो : Amar Ujala (File Photo)


इसके पहले किसान तीनों विवादित कृषि कानूनों की वापसी के मुद्दे पर एक साल से लंबा आंदोलन कर केंद्र सरकार को भारी मुश्किल में डाल चुके हैं। केंद्र ने पांच राज्यों के चुनाव के ठीक पहले कृषि कानूनों की वापसी कर किसानों को अपने घर वापस भेजने में सफलता पाई थी, लेकिन बदले हालात में यह मुश्किल एक बार फिर उसके सामने खड़ी हो सकती है।   


दरअसल, किसान संगठनों ने दिल्ली में सोमवार को एक बड़ी बैठक की। इस बैठक में आंदोलन के असर को बरकरार रखने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। किसान संगठन चाहते हैं कि चुनावी जीत के शोरगुल में उनके जमीनी मुद्दे गायब नहीं कर दिए जाने चाहिए, लिहाजा सरकार को चेताने के लिए मार्च से लेकर अप्रैल तक कई कार्यक्रम कर सरकार को उसके वायदों की याद दिलाई जाती रहेगी।  


अनुमान है कि होली के त्योहार के बाद उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्य़मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। यह शपथ ग्रहण समारोह 21 मार्च के आसपास हो सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए किसानों ने 21 मार्च को ‘वादा खिलाफी दिवस’ मनाने का निर्णय लिया है। इस दिन पूरे देश में जिलों-तहसीलों पर किसान एकत्र होकर सरकार के उन वादों पर चर्चा करेंगे जिन्हें कानून वापसी के समय किसानों से पूरा किया गया था, लेकिन उन पर अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। सभी जिलों के जिलाधिकारियों को वादा खिलाफी का ज्ञापन भी दिया जाएगा।  


किसानों से लखीमपुर खीरी हिंसा में पीड़ित किसानों की मदद करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात भी कही गई थी। लेकिन मामले का सबसे बड़ा आरोपी केंद्रीय मंत्री का पुत्र आशीष मिश्रा इस समय जमानत पर जेल से बाहर है। किसानों को लगता है कि इस मामले में पर्याप्त कार्रवाई नहीं हो रही है और वे इस पर सरकार से नाराज हैं।

बड़ा आंदोलन

किसान नेता डॉ. आशीष मित्तल ने अमर उजाला से कहा कि यदि मार्च तक एमएसपी पर कमेटी का गठन नहीं किया जाता है तो किसान एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। किसान पूरे देश में 11-17 अप्रैल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बड़ा आंदोलन करेंगे। यदि इसके पहले केंद्र सरकार कमेटी के गठन पर कोई ठोस निर्णय ले लेती है तो इस कार्यक्रम का स्वरूप बदल जाएगा। लेकिन कोई ठोस निर्णय न होने पर इसे एमएसपी से जोड़ते हुए बड़ा आंदोलन किया जाएगा।



किसानों की मांग है कि हर राशन कार्ड पर हर महीने प्रति परिवार न्यूनतम 10 किलो राशन देना अनिवार्य किया जाए। जिससे सरकार को भारी मात्रा में अनाज की आवश्यकता बनी रहे और जिसे किसानों से फसल खरीद कर पूरा किया जाए। इससे फसलों की निर्बाध खरीद जारी रहने का व्यावहारिक रास्ता तैयार हो सकता है। राशन के साथ एक किलो चना, एक किलो तेल और एक किलो नमक जैसी आवश्यक वस्तुओं को भी दिए जाने की मांग की जा सकती है।  


अभी केंद्र सरकार गेंहूं पर 1975 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य देती है। किसानों का कहना है कि यह मूल्य लगभग 2700 रुपये के करीब होना चाहिए। सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य जो सरकार 4600 रुपये देती है, उसे कम से कम 8200 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। इसी प्रकार अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी वृद्धि की जानी चाहिए। और प्रति वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाना चाहिए।  

श्रमिकों का साथ देंगे किसान

देशभर के श्रमिक नए कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए 28-29 मार्च को बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर चुके हैं। किसान संगठनों के आंदोलन में श्रमिक बार-बार उनका साथ देते रहे हैं और उनके आंदोलन को पूरा नैतिक समर्थन देते रहे हैं। अब किसान श्रमिकों के आंदोलन को पूरा समर्थन देगे। किसानों की मांग है कि सरकारी तंत्र को निजी हाथों में बेचने की सरकारी नीति का त्याग किया जाना चाहिए।

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