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किसान आंदोलन: 'दिल्ली दूर नहीं है', भारत बंद के जरिए सरकार को चेताने में कामयाब रहे अन्नदाता

Fri, 26 Mar 2021 08:19 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किसान नेता दर्शनपाल कहते हैं, इस बंद के लिए ज्यादा किसानों को एकत्रित नहीं किया गया, क्योंकि खेतों में इस वक्त काम ज्यादा है। संगठनों ने अपने साथियों से यह अनुरोध किया था, वे जहां पर हैं, वहीं बंद कराने का प्रयास करें...
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भारत बंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किसान आंदोलन के नेताओं ने शुक्रवार को भारत बंद का आह्वान किया था। हरियाणा और पंजाब में इसका व्यापक असर देखने को मिला है। किसान नेता 'भारत बंद' के जरिए केंद्र सरकार को चेताने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने यह संदेश भी दे दिया कि दिल्ली अब दूर नहीं है। आज किसान भले ही अपने खेत में अन्न एकत्रित कर रहा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे दिल्ली आने में वक्त नहीं लगाएंगे।

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बंद के दौरान जोश की जगह मजबूरी ही अधिक नजर आई। सड़कों पर बैठे किसानों को देखकर ऐसा लगा कि जैसे यह बंद प्रतीकात्मक हो। शहरों के अधिकांश बाजार खुले रहे, मगर सभी राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद किए गए थे। दोनों ही राज्यों में सार्वजनिक परिवहन के अलावा निजी बसें भी सड़कों पर नहीं निकली। ट्रेनों का आवागमन प्रभावित हुआ।

किसान नेता दर्शनपाल कहते हैं, सरकार जो भी कहे, लेकिन किसानों ने 'भारत बंद' करके सरकार को जवाब दे दिया है। इस बंद के लिए ज्यादा किसानों को एकत्रित नहीं किया गया। वजह, खेतों में इस वक्त काम ज्यादा है। किसान संगठनों ने अपने साथियों से यह अनुरोध किया था कि वे जहां पर हैं, वहीं बंद कराने का प्रयास करें। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में भी बंद का असर देखने को मिला है।
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कई जगहों पर महिला किसानों ने भारत बंद को सफल बनाया है। इस भारत बंद का मकसद सरकार को चेताना था। केंद्र इस गलतफहमी में न रहे कि किसान अपने खेतों में चला गया है, तो वहां से वापस नहीं आ सकता। इस बंद के जरिए किसानों ने सरकार को बता दिया है कि एक अपील पर वे दिल्ली घेर सकते हैं। दर्शनपाल के मुताबिक, किसान आंदोलन कई तरह से करवटें ले रहा है। समय आने पर रणनीति का खुलासा कर देंगे।

पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजे किसान आंदोलन को प्रभावित कर सकते हैं, इस बाबत किसान नेता अविक साहा कहते हैं, सरकार शुरू से ही यह मानकर चल रही है कि पश्चिम बंगाल में अगर भाजपा आई तो आंदोलन को सख्ती से दबा दिया जाएगा। हम पूछते हैं कि अगर वहां भाजपा की करारी हार हुई तो केंद्र सरकार किसानों की सारी मांगें मान लेगी। ये सब दुष्प्रचार का हिस्सा है। किसान यह आंदोलन कर रहा है और ये आगे भी जारी रहेगा। इसका किसी राज्य के चुनाव से कोई लेना देना नहीं है। भारत बंद से किसानों ने सरकार को यह बता दिया है कि किसान कम संख्या में भी ऐसा कर सकते हैं। फसल कटाई के बाद जब किसान दिल्ली पहुंचकर दहाड़ेगा तो सरकार हिल जाएगी।

इस दौरान शुक्रवार को आयोजित बंद में हरियाणा और पंजाब में रेल सेवा भी पूरी तरह बाधित रही है। पानीपत और डाहर टोल प्लाजा पर हाईवे को जाम कर दिया गया था। रोहतक और बहादुरगढ़ के बीच टोल प्लाजा बंद रहा। बाइक सवार को भी नहीं जाने दिया जा रहा था, जिसके चलते कई जगहों पर किसानों के साथ वाहन चालकों की कहासुनी भी हो गई। हिसार, अंबाला, गुरुग्राम और रेवाड़ी से गुजरने वाले राजमार्ग जाम रहे।

मालवा एक्सप्रेस, झेलम, सचखंड, भठिंडा और जनशताब्दी जैसी ट्रेनों पर ब्रेक लग गया। पंजाब के तकरीबन सभी शहरों और गांवों में भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। फतेहगढ़ साहिब, अमृतसर, लुधियाना और जालंधर सहित सभी दूसरे जिलों में भी सड़क यातायात और ट्रेन बंद रही।

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