नए कृषि कानूनों पर प्रधानमंत्री मोदी को आड़े हाथों लेने वाले किसान अब मोहब्बत और प्रेम की दुहाई देते हुए नजर आ रहे हैं। किसान नेता मोदी को उनके पुराने वादे याद दिला रहे हैं। किसानों का कहना है कि मोदी कहते हैं कि हम उनके दिलों में बसते हैं। अगर आम लोगों को वैक्सीन लग रही है तो बॉर्डर पर बैठे प्रदर्शनकारी किसानों को क्यों। क्या हमारी हालत देखकर भी प्रधानमंत्री का दिल नहीं पसीज रहा।
किसान नेता हन्ना मौला ने अमर उजाला से कहा, हमारी केंद्र सरकार से मांग है कि बॉर्डर पर बैठे सभी किसानों का मुफ्त में वैक्सीनेशन होना चाहिए। वैक्सीन लगाने के लिए दिल्ली के सभी बॉर्डर पर एक सेंटर बनाया जाना चाहिए। ताकि किसान वहां जाकर वैक्सीन लगवा सकें। पीएम खुद कहते है कि किसानों से मुझे मोहब्बत है और मैं उनसे केवल एक फोन कॉल दूर हूं, अगर हमसे प्रेम है तो हमें भी बचाना तो चाहिए। हमें भी तो वैक्सीन लगानी चाहिए।
भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेद्र मलिक बताते हैं कि हम लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि बॉर्डर पर बैठे किसानों का भी टीकाकरण किया जाए। अगर सरकार कोई आसपास अस्तपाल तय कर देती है, तो हम सभी वहां जाकर वैक्सीन लगवा लेंगे। या सरकार हमारे प्रदर्शन स्थलों पर ही टीम भेज दे, हम प्रशासन की मदद करेंगे और सभी लोगों को वैक्सीन भी लगवाएंगे।
आधे इंजेक्शन पुलिस कर्मी लगवाएंगेः टिकैत
इधर, शुक्रवार को हिसार में एक धरने को संबोधित करते हुए कहा कि बॉर्डर पर बैठे किसान इंजेक्शन लेंगे लेकिन कोरोना टेस्ट नहीं कराएंगे। इंजेक्शन भी तब लगवाएंगे जब आधे इंजेक्शन पुलिसकर्मी लगवाएंगे। हमें सरकार पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।
टिकैत ने आगे कहा कि अगर कोरोना इतना खतरनाक है तो कुछ लोग बंगाल में रैली क्यों कर रहे हैं। हमारे आंदोलन को चलते हुए अभी पांच महीने हुए हैं। अगर सरकार पांच साल चलती है तो आंदोलन पांच साल क्यों नहीं चल सकता।
गौरतलब है कि बीते वर्ष नवंबर माह से नए कृषि कानूनों की मांग को रद्द करने को लेकर किसान संगठन दिल्ली की सीमाओं पर धरने पर बैठे हैं। किसानों और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की चर्चाएं भी हुईं लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है।