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कर्जमाफी के निर्णय पर योगेंद्र यादव ने जताई चिंता, कहा- कहीं 2-4 रुपये माफ न करने लगें सरकारें

Tue, 18 Dec 2018 09:30 PM IST
Gaurav Pandey डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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योगेंद्र यादव (फाइल फोटो)
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स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान नेता योगेंद्र यादव और जय किसान आंदोलन के संयोजक अभिक साहा का कहना है कि राज्य सरकारें कर्ज के नाम पर कहीं 2-4 रुपये माफ न करने लगें। सरकारें कई बार दबाव में किसान कर्जमाफी की घोषणाएं तो कर देती हैं, पर जब कर्जमाफी का अमल शुरू होता है तो वह माफी कुछ रुपयों तक सीमित हो जाती है। 

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ऐसे में जरूरी है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में नवनिर्वाचित दोनों राज्य सरकारें पूर्व की सरकारों द्वारा किसानों की कर्ज माफी के नाम पर किए मजाक को न दोहराएं। मंगलवार को जारी एक बयान में यादव और साहा ने कहा, वे केवल कर्ज माफी के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि एक स्थाई कर्ज मुक्ति के हिमायती हैं। साथ ही उन्होंने दोहराया, जब तक दावे अमल में न आ जाएं, तब तक किसानों को अपनी मांगों में ढील नहीं बरतनी चाहिए। 

हालांकि राज्य सरकारों द्वारा किसान कर्जमाफी की घोषणा का स्वागत है, लेकिन अभी यह कागज की घोषणा है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और कर्नाटक का अनुभव बताता है कि कागजी घोषणा अंतिम किसान तक नहीं पहुंच पाती है। नई सरकारों का असली इम्तिहान यही होगा कि इस ऋण मुक्ति का लाभ अंतिम किसान को मिलता है या नहीं।

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'किसानों की ऋणमुक्ति जरूरी, उचित और संभव'

उन्होंने कहा, यह आशंका किसी कल्पना पर नहीं, बल्कि ठोस आधार पर बता रहे हैं कि घोषणाओं के बावजूद कांग्रेस-भाजपा की सरकारों ने किसानों की कर्जमाफी नहीं की। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार ने, पंजाब में कांग्रेस सरकार ने और कर्नाटक में कांग्रेस व जनता दल (सेकुलर) की सरकार ने अपनी घोषणा पर अब तक अमल नहीं किया है। 

योगेंद्र यादव के मुताबिक, किसानों की ऋण मुक्ति जरूरी है, उचित है और संभव भी, लेकिन कर्जमाफी अपने आप में किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं है। ऋण मुक्ति तभी उपयोगी हो पाएगी, जब बिना शर्त बैंक और साहूकार दोनों तरह के ऋण से किसान को मुक्ति मिले। ऋण मुक्ति के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि की समुचित व्यवस्था भी हो। जब तक ऐसा नहीं होता तब तक किसान हितैषी होने के दावे खोखले ही साबित होंगे।
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