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बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर की खोज करने वाले बीबी लाल पद्म विभूषण से सम्मानित

Tue, 26 Jan 2021 07:16 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पुरातत्वविद प्रो. बीबी लाल (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व महानिदेशक रहे बीबी लाल को सबसे ज्यादा चर्चा अयोध्या की बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे की नींव में मंदिर मौजूद होने की खोज के लिए मिली थी।

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1921 में उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे ब्रजबासी लाल को साल 2000 में पद्म भूषण सम्मान दिया जा चुका है। प्रो. लाल ने हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश), शिशुपालगढ़ (उड़ीसा), पुराण किला (दिल्ली), कालीबंगन (राजस्थान) सहित कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई कर इतिहास की बहुत सारी परत दुनिया के सामने खोली हैं।

1975-76 के बाद से प्रो. लाल ने रामायण से जुड़े अयोध्या, भारद्वाज आश्रम, श्रृंगवेरपुरा, नंदीग्राम और चित्रकूट जैसे स्थलों की खुदाई कर अहम तथ्य दुनिया तक पहुंचाएं। उनके नाम पर 150 से अधिक शोध लेख दर्ज हैं।
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बीबी लाल की किताब 'राम, उनकी ऐतिहासिकता, मंदिर और सेतु: साहित्य, पुरातत्व और अन्य विज्ञान' को लेकर खासी बहस हुई थी। इसमें विवादित ढांचे के नीचे मंदिर होने की बात कही गई थी। 

दिल्ली के पुराने किले में दफन है पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने लगभग 67 साल पहले पुराने किले में की गई खोदाई के दौरान सामने आए प्राचीन संरचनात्मक अवशेषों के संरक्षण का फैसला लिया है। देश के आजाद होने के बाद यह पहली खोदाई थी जो 1953 में हुई थी। यह खोदाई पुराने किले में पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ का पता लगाने के लिए हुई थी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर 1969-1973 में भी इस किले में उत्खनन कार्य हुआ था। दोनों बार की खोदाई का कार्य प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पद्मश्री बीबी लाल के नेतृत्व में हुआ था। अब प्रो. बीबी लाल 100 के हो चुके हैं। कुछ दिन पहले ही केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने उनके घर जाकर उनका जन्मदिन मनाया था।

 प्रो. बीबी लाल द्वारा 1953-54 और 1969-1973 में उत्खनन के दौरान टेराकोटा खिलौने और चित्रित कटोरे मिले थे। जिनका संबंध 1200 से 800 ईसा पूर्व तक का माना गया था। ताजा खोदाई 2018 में हुई। 2018 की खोदाई में भी पूर्व में हुई खोदाई से मिलते जुलते प्रमाण मिले थे। 2019 में यहां फिर खोदाई की अनुमति दी गई थी, मगर समय पर काम शुरू न हो पाने से इसे बाद में निरस्त कर दिया गया था।

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