गुजरात में पालनपुर जिले के जेतवास गांव से एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति अपने कुत्ते के नाम पर बीते आठ सालों से राशन ले रहा था। कुत्ते के मरने पर महिला नाम जुड़वाने जब तहसील पहुंची तो इस बात का खुलासा हुआ। ये परिवार बेहद गरीब है। घर की नई बहू का नाम जुड़वाने के लिए परिवार कई बार चक्कर लगा चुका था लेकिन इनकी सुनवाई नहीं हुई।
बाद में जब परिवार के लोग तहसीलदार कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने कहा कि कालू कुत्ते का नाम जोड़ सकते हो पर बहू का नहीं। तब जाकर इस बात का खुलासा हुआ। महिला ने कहा कि 8 साल पहले जनगणना करने पहुंची टीम ने कुत्ते का नाम राशन कार्ड में दर्ज किया था।
इससे पहले ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के धार जिले से भी सामने आया था। यहां एक व्यक्ति अपने कुत्ते के नाम पर सालभर से राशन ले रहा था। उसने राजू नाम से अपने पालतू कुत्ते का नाम राशन कार्ड में दर्ज करवाया था। मामला जिले के ग्राम पंचायत बोडिया का है। लेकिन आधार कार्ड ने उसका ये राज खोल दिया। जब उससे तीनों लोगों के आधार नंबर मांगे गए तो उसने केवल दो के ही दिए और कहा कि तीसरा तो उसका कुत्ता है।