पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में वन्यजीव संरक्षण और प्रवासी पक्षियों के वैज्ञानिक अध्ययन को नई दिशा देते हुए “मणिपुर अमूर फाल्कन ट्रैकिंग प्रोजेक्ट फेज–II” के तहत टैग किए गए तीन अमूर फाल्कन की ताज़ा स्थिति सामने आई है। वन विभाग, मणिपुर और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयास से नवंबर 2025 में सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए तीन अमूर फाल्कन- आहू, अलंग और अपापांग, वर्तमान में अफ्रीका के विभिन्न देशों में सक्रिय और सुरक्षित पाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन्होंने महज आठ से दस दिनों में 8 हजार से 12 हजार किलोमीटर की दूरी तय की।
9-10 दिनों में अफ्रीका पहुंचकर बनाया रिकॉर्ड
विशेषज्ञों के अनुसार, टैगिंग के बाद तीनों अमूर फाल्कन महज 9 से 10 दिनों के भीतर अफ्रीका पहुंच गए, जो कि एक रिकॉर्ड समय माना जा रहा है। वर्तमान में ये पक्षी अफ्रीका के विभिन्न देशों में अपने शीतकालीन प्रवास (विंटरिंग माइग्रेशन) का आनंद ले रहे हैं।
पूर्व में आशंका जताई गई थी कि आहू को किसी प्रकार की समस्या हो सकती है, लेकिन नवीनतम आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि वह भी सुरक्षित है और सोमालिया क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर मूवमेंट कर रहा है।
पिछले वर्ष के अनुभव से मिला था महत्वपूर्ण संकेत
वन अधिकारियों के अनुसार, पिछले शीतकालीन प्रवास के दौरान ‘चिउलुआन–2’ नामक टैग किए गए फाल्कन ने 14 अप्रैल 2025 को अपने प्रजनन स्थल (ब्रीडिंग ग्राउंड) की ओर उत्तर दिशा में वापसी शुरू की थी। इस बार भी वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अप्रैल माह में ये पक्षी अपने मूल प्रजनन क्षेत्रों की ओर लौटना प्रारंभ करेंगे।
संरक्षण और शोध के लिए अहम पहल
अमूर फाल्कन दुनिया के सबसे लंबी दूरी तय करने वाले प्रवासी शिकारी पक्षियों में से एक है, जो पूर्वोत्तर भारत से अफ्रीका तक हजारों किलोमीटर की उड़ान भरता है। मणिपुर के तमेंगलोंग और आसपास के क्षेत्र इन पक्षियों के महत्वपूर्ण रोस्टिंग स्थल माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट ट्रैकिंग से प्राप्त डेटा न केवल इन पक्षियों के जीवन चक्र को समझने में मदद करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी पक्षियों के संरक्षण नेटवर्क को भी मजबूत करेगा। वन विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय समुदायों, विशेषकर चिउलुआन गांव के स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की है। उनका कहना है कि समुदाय आधारित संरक्षण मॉडल से ही अमूर फाल्कन जैसे संवेदनशील प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।