खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में पदस्थ बताकर फर्जी तबादले और जांच के 'आदेश' जारी करने और नौकरी लगवाने के नाम पर रुपये ऐंठने का मामला सामने आया है। पीएमओ के अधिकारियों द्वारा मामले में शिकायत दर्ज कराने के बाद सीबीआई ने फर्जी अधिकारियों के खिलाफ तीन एफआईआर दायर की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। ये तीनों एफआईआर मंगलवार को दर्ज की गईं। पहली एफआईआर पीएमओ में सहायक निदेशक अनिल कुमार शर्मा की शिकायत पर की गई है।
फर्जीवाड़े का पहला केस
इस शिकायत में कहा गया है कि चंडीगढ़ में पदस्थ एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी से एक व्यक्ति ने संपर्क किया और खुद को पीएमओ में पदस्थ संयुक्त सचिव रोहित यादव बताया। उसने आईपीएस अधिकारी से एक पुलिस कांस्टेबल के तबादले का आग्रह किया। शिकायत के अनुसार प्रथम दृष्ट्या लगता है कि यह मामला फर्जी है, क्योंकि ऐसा कोई फोन नहीं किया गया और इस्तेमाल किए गए फोन का नंबर भी अधिकारी का नहीं है।
फर्जीवाड़े का दूसरा केस
इसी तरह दूसरा मामला पीएमओ में पदस्थ सहायक निदेशक पीके इस्सर का है। इसमें एक मामले की जांच शुरू करने का फर्जी आदेश जारी किया गया है। इसमें केरल के डॉ. शिव कुमार नाम के व्यक्ति ने खुद को पीएमओ का अधिकारी बताते हुए अपने मोबाइल से लोगों को फोन किए। वह खुद को प्रधानमंत्री का निजी सलाहकार बताता था।
फर्जीवाड़े का तीसरा केस
तीसरी एफआईआर में एक शिकायतकर्ता ने कहा है कि एक व्यक्ति ने खुद को पीएमओ में निजी सहायक बताते हुए रविकांत खरब नाम के व्यक्ति को तीन लाख रुपये लेकर रिजर्व बैंक में सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया। इस फर्जी निजी सहायक ने खरब से 25 हजार रुपये बतौर एडवांस ले लिए थे।
आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करेंगे : सीबीआई
सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तीनों एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।