प्रक्रिया में हुए ये बदलाव
अब सांसदों को अपने आग्रह लेटरहेड हस्ताक्षरों के साथ भेजना होगा। हर पत्र में सांसद का पहचान पत्र नंबर, उनके दफ्तर के टेलीफोन नंबर और निजी सहायक के मोबाइल नंबर लिखना जरूरी होगा। लेटरहेड की एक प्रति रेल मंत्रालय को भेजना जरूरी होगा, ताकि फर्जी लेटरहेड की पहचान हो सके। यदि किसी रिश्तेदार के लिए यह आग्रह कर रहे हैं तो यह भी अपने पत्र में लिखना होगा। जिस व्यक्ति का आरक्षण चाहते हैं, उसके भी सभी विवरण देने होंगे, वह भी विशेष फॉर्मेट में, जिसकी प्रति सभी सांसदों को भेज दी गई है।
करें लेटरहेड की नंबरिंग
रेल राज्यमंत्री ने सांसदों से आग्रह किया है कि वह अपने लेटरहेड की हर महीने नंबरिंग करें, ताकि मंत्रालय द्वारा पूछे जाने पर वह बता सकें कि उनका आग्रह सही है या फर्जी।
रद्द भी हो सकता है आरक्षण
मंत्रालय ने वीआईपी कोटे से किए जा रहे आरक्षण के औचक निरीक्षण के भी संकेत दिए हैं। हर यात्री का मोबाइल नंबर आग्रह पत्र में लिखना जरूरी होगा। यदि यात्री के पास अन्य फोन नंबर मिला तो आरक्षण रद्द भी किया जा सकता है।