कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए देशभर में कोरोना टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन अब इस अभियान को लेकर भी फर्जीवाड़ा किया जाने लगा है। दरअसल, मुंबई पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है जो कथित तौर पर शहर में फर्जी कोविड-19 टीकाकरण अभियान चला रहे थे। आरोपी शहर के विभिन्न सोसाइटियों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर इस तरह के फर्जी टीकाकरण अभियान चला रहे थे। पुलिस सूत्रों ने कहा कि इस मामले में जल्द ही एक प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और तीनों की गिरफ्तारी की संभावना है। फिलहाल उनसे पूछताछ की जा रही है और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
टीकाकरण शिविर के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा
एक समाचार चैनल ने बुधवार (16 जून) को बताया कि मुंबई के कांदिवली में एक हाउसिंग सोसाइटी के निवासियों को कोरोना टीकाकरण अभियान चलाने के बहाने तीन लोगों के समूह ने ठग लिया। बता दें, 30 मई को हीरानंदानी एस्टेट सोसाइटी में टीकाकरण शिविर के नाम पर लगभग 390 लोगों को कोविशील्ड की खुराक दी गई। निवासियों ने कहा कि राजेश पांडे नाम के एक सूत्रधार ने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल का प्रतिनिधि होने का दावा करते हुए समिति के सदस्यों से संपर्क किया। जबकि टीकाकरण अभियान का संचालन संजय गुप्ता नाम के शख्स ने किया। वहीं, तीसरे व्यक्ति महेंद्र सिंह ने सोसायटी के सदस्यों से नकद राशि एकत्र की।
सोसाइटी की तरफ से ठगों को दिए गए 5 लाख रुपए
सोसाइटी की तरफ से 390 लोगों के टीकाकरण के लिए प्रति खुराक 1,260 रुपये के हिसाब से सूत्रधार को करीब पांच लाख रुपये का भुगतान किया गया। इस बीच संदेह तब पैदा हुआ जब टीका लगाए गए व्यक्तियों में से किसी में भी टीकाकरण के बाद के कोई लक्षण विकसित नहीं हुए। इन संदेहों को तब और बल मिला जब उन्हें विभिन्न अस्पतालों जैसे नानावटी, लाइफलाइन, नेस्को बीएमसी टीकाकरण केंद्र आदि से टीकाकरण प्रमाण पत्र मिलने लगे। वहीं, जब इन अस्पतालों से संपर्क किया गया तब पता चला कि इनकी तरफ से हीरानंदानी हाउसिंग सोसाइटी को कभी भी टीके उपलब्ध नहीं कराए गए।
आरोपियों ने प्रोडक्शन हाउस को भी ठगा
इधर, शहर के एक प्रोडक्शन हाउस ने भी आरोप लगाया कि उनके कर्मचारियों को भी इसी तरह से ठगा गया है। माचिस प्रोडक्शन हाउस ने आरोप लगाया कि मुंबई में 29 मई को लगभग 150 कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को कोविशील्ड टीका लगाया गया था। टीकाकरण अभियान उसी समूह द्वारा आयोजित किया गया था, जिस पर अब मुंबई के कांदिवली में हीरानंदानी एस्टेट सोसाइटी में एक नकली अभियान आयोजित करने का आरोप है।
कर्मचारी इंजेक्ट किए गए पदार्थ को लेकर चिंतित
प्रोडक्शन हाउस ने कहा कि उसके कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और कोविड-19 वैक्सीन के नाम पर उनके शरीर में इंजेक्ट किए गए पदार्थ को लेकर चिंतित हैं। हीरानंदानी एस्टेट सोसाइटी के पीड़ितों की तरह ही प्रोडक्शन हाउस के कर्मचारियों ने भी कहा कि उन्हें टीकाकरण के बाद के किसी भी लक्षण का अनुभव नहीं हुआ है जो आमतौर पर वैक्सीन लाभार्थियों के बीच रिपोर्ट किया जाता है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि उन्हें 12 जून तक कोई टीकाकरण प्रमाण पत्र भी नहीं दिया गया था।
अस्पतालों ने टीकाकरण अभियान चलाने से किया इनकार
टीकाकरण के दिन प्रोडक्शन हाउस के कर्मचारियों को बताया गया कि अभियान कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल द्वारा चलाया जा रहा है, जबकि 12 जून को उनके प्रमाण पत्र नानावती अस्पताल द्वारा जारी किए गए थे। इन दोनों अस्पतालों ने प्रोडक्शन हाउस के लिए कोई टीकाकरण अभियान चलाने से इनकार किया है। सूत्रों ने बताया कि माचिस प्रोडक्शन हाउस में अभियान का आयोजन एसपी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ने किया।
औपचारिक शिकायत होगी दर्ज
एक समाचार चैनल से बात करते हुए नानावती अस्पताल ने कहा, ‘यह हमारे संज्ञान में लाया गया है कि अंधेरी स्थित एक संगठन के स्टाफ सदस्यों को नानावती मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के नाम से कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र जारी किया गया था। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमने उक्त परिसर में कोई टीकाकरण शिविर नहीं लगाया है। हम संबंधित अधिकारियों को सूचित कर रहे हैं और इसके बारे में औपचारिक शिकायत दर्ज करेंगे।’
बीएमसी ने उच्चस्तरीय जांच के दिए आदेश
इस बीच माचिस प्रोडक्शन हाउस के प्रोड्यूसर संजय राउत्रे ने कहा, 'जब तक मेरे पास सारे तथ्य नहीं होंगे तब तक मैं कोई कमेंट नहीं करना चाहूंगा। पहले हमें यह पता लगाना होगा कि हम प्रभावित हैं या नहीं। अगर हां, तो हम कार्रवाई करेंगे।' बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। एक डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर (डीएमसी) जांच का नेतृत्व करेंगे और उन्हें मामले की जांच करने और एक रिपोर्ट जमा करने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है।