दस्तकारों और बेरोजगारों को अपना धंधा शुरू करने के लिए करीब एक साल पहले शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में भी घोटाला हो गया है। बिना किसी गारंटी के 50 हजार तक का ऋण मिलने का लाभ उठाकर जालसाजों से कई बैंकों के मैनेजर व स्टाफ ने हाथ मिला लिया। फर्जी नाम-पतों से बड़ी संख्या में कई करोड़ के लोन स्वीकृत कर दिए गए।
इसका खुलासा वित्त मंत्रालय की विजिलेंस टीम ने किया है। उसकी रिपोर्ट पर बरेली स्थित विजया बैंक की सेटेलाइट शाखा के प्रबंधक को हटा दिया गया है। अन्य बैंकों में इसी तरह हुए घोटालों और फरार फर्जी खातेदारों की छानबीन शुरू हो गई है। कई माध्यम से पहुंची शिकायतों के आधार पर वित्त मंत्रालय की विजिलेंस ने रिपोर्ट तैयार की। इसमें चौंकाने वाले तथ्य थे।
बात सामने आई कि आवेदन पत्र के साथ फर्जी आईडी इस्तेमाल कराई गईं। इन तथ्यों के आधार पर मेरठ स्थित विजया बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने बरेली आकर सेटेलाइट शाखा से जारी हुए मुद्रा लोन के खाते चेक किए। लोन फार्म में दर्शाए गए पतों का सत्यापन किया गया तो ऋण लेने वाले कई आवेदक दर्शाए गए पतों पर नहीं मिले।