मशहूर पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज की बेटी मोनीजा हाशमी को 10 मई को दिल्ली में आयोजित किए गए एशिया मीडिया शिखर सम्मेलन में बतौर वक्ता बोलना था। लेकिन अंतिम समय में उनका नाम वक्ताओं की सूची से हटा दिया गया।
15वां एशिया मीडिया शिखर सम्मेलन पहली बार भारत में हुआ था जिसे केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दो स्वायत्त निकायों ने आयोजित किया था।
मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद कार्यक्रम के मुताबिक, हाशमी का नाम 'क्या सभी अच्छी कहानियां व्यावसायिक रूप से सफल होनी चाहिए' विषय पर बोलने वाले वक्ताओं की सूची में शामिल था। उन्हें पाकिस्तान स्थित केएएसएचएफ फाउंडेशन की रचनात्मक और मीडिया प्रमुख के रूप में आमंत्रित किया गया था। हालांकि 9 मई को मंत्रालय ने अंतिम कार्यक्रम की सूची जारी की जिसमें बतौर वक्ता हाशमी का नाम नहीं था।
मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, वक्ताओं के बारे में फैसला लेने वालों में बहुत कम लोग शामिल थे और एजेंडा में बदलाव आखिरी मिनट में किया गया था। कार्यक्रम के मेजबानों में से एक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी) के महानिदेशक के जी सुरेश ने एक ने कहा कि उन्हें या उनके संस्थान से वक्ताओं के बारे में नहीं पूछा गया था। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि, कुआलालंपुर में स्थित एक अंतर सरकारी निकाय 'एशिया पैसिफिक इंस्टीट्यूट फॉर ब्रॉडकास्टिंग डेवलपमेंट (एआईबीडी)' और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फैसला किया था कि वक्ताओं कौन होंगे।
प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो के प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल सीतांशू कार ने कहा कि उन्हें वक्ताओं के बारे में सूचित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन के एजेंडे के बारे में उनसे परामर्श नहीं किया गया था और इसलिए उन्हें "ऐसी किसी भी चीज के बारे पता नहीं था।"
शिखर सम्मेलन की मेजबानी एक अन्य स्वायत्त निकाय ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (बीईसीआईएल) ने की थी। बीईसीआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक जॉर्ज कुरुविल्ला ने अपने मोबाइल फोन पर किए गए किसी भी मैसेज और कॉल का जवाब नहीं दिया।
सूत्रों ने बताया कि हाशमी को फैज पर आयोजित होने वाले एक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फरवरी में भारत का "छह महीने, बहु-प्रवेश" वीजा दिया गया था, और उन्हें इसके अलावा किसी अन्य सम्मेलन में भाग लेने की इजाजत नहीं थी।
सूत्रों ने कहा कि दिल्ली में मीडिया शिखर सम्मेलन के आयोजकों को पाकिस्तान के नागरिकों के लिए "राजनीतिक मंजूरी" नहीं दी गई थी। इसलिए, जबकि हाशमी देश का दौरा कर सकती थीं, उन्हें किसी अन्य सम्मेलन में भाग लेने से रोक दिया गया था।
हाशमी से इस बारे में ई-मेल के जरिये सवाल किया गया था जिसका उन्होंने जवाब नहीं दिया।