शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने मंगलवार को आरोप लगाया कि देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री निवास 'वर्षा' में इसलिए नहीं जा रहे हैं, क्योंकि वह अंधविश्वास में भरोसा करते हैं।
राउत ने कहा, अफवाह है कि एकनाथ शिंद की गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर की यात्रा के दौरान कथित तौर पर भैसों की बलि दी गई थी और उनको 'वर्षा' के परिसर में दफनाया गया था, ताकि मुख्यमंत्री का पद शिंदे के अलावा किसी और के पास न चला जाए। उन्होंने कहा, देवेंद्र फडणवीस वर्षा में क्यों नहीं जा रहे? मुख्यमंत्री ने कहा है कि अगर वह वहां जाएंगे भी तो वहां नहीं सोएंगे। यह क्या है? शिवसेना के 'लिंबू सम्राट, लिम्बू मिर्ची' इस पर जवाब दें। नींबू और मिर्च का इस्तेमाल काला जादू से जुड़ी प्रथा में किया जाता है।
राउत ने संवाददाताओं से कहा, मैंने सुना है कि भाजपा में चर्चा हो रही है कि गुवाहाटी में बलि दी गई भैसों के सींगों को वर्षा के बागीचे में दफनाया गया था। मुख्यमंत्री की कुर्सी किसी और के पास न चली जाए, इसलिए यहां सींग लाए गए, ऐसा स्टाफ का कहना है।
मुख्यमंत्री के सहयोगियों की ओर से राउत के आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। हालांकि, शिवसेना प्रमुख और उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने यह कहकर चुटकी ली कि राउत उस क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं, उन्हें यह पता होना चाहिए।
पहले राउत ने आरोप लगाया था कि जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह किया। उस समय असम के गुवाहाटी शहर में उन्होंने अन्य बागी शिवसेना विधायकों के साथ एक होटल में डेरा डाला था,तब वहां भैंसों की बलि दी गई थी। इसके बाद शिंदे महाराष्ट्र लौटे और ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार को गिराकर मुख्यमंत्री बन गए।
राउत ने फडणवीस से पूछा किया वह वर्षा में क्यों नहीं रह रहे हैं, जो राज्य का गर्व है। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र एक प्रगतिशील राज्य हैं, जहां महात्मा फुले, प्रभोधनकर ठाकरे और गाडगे महाराज जैसे समाज सुधारकों ने अंधविश्वास का विरोध किया था। लेकिन अब अंधविश्वास ने सत्ता के गलियारों में अपनी जगह बना ली है।