सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का सुबह राजस्थान के पोखरण टेस्ट रेंज से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। इंडो-रसियन ज्वाइंट वेंचर के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज को 400 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को 40 सुखोई लड़ाकू विमानों पर एकीकृत करने के लिए काम चल रहा है, उम्मीद है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा प्रणाली विकसित होने के बाद भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।
लेकिन भारत के लिए ब्रह्मोस इतना खास क्यों है? आखिर इस टेस्ट के बाद पाकिस्तान और चीन को एक साथ क्यों आना पड़ा, एक खबर के मुताबिक ब्रह्मोस परीक्षण के बाद चीन ने पाकिस्तान को मिसाइल ट्रैकिंग सिस्टम बेचा है ऐसी खबर आ रही है। जाहिर है कि भारत में ब्रह्मोस परीक्षण का पूरी दुनिया में असर हुआ है। वो कौन सी खासियत है जिसके चलते 'ब्रह्मोस' ने भारतीय ताकत को इतना बढ़ा दिया है।
क्या करेगा ब्रह्मोस?
ब्रह्मोस एक ठोस प्रणोदक बूस्टर इंजन के साथ एक दो-स्तरीय मिसाइल है।
द्वितीय चरण में तरल रामजेट से इसकी रफ्तार 3 मील हो जाती है जो ध्वनि की गति से तीन गुना।
मिसाइल की रेंज सुपरसोनिक गति के साथ 290 किलोमीटर की है, जिसका अर्थ है कि यह लक्ष्य को तेजी से परखता है। इस प्रकार ये लक्ष्य का कम फैलाव सुनिश्चित करता है।
मिसाइल 'फायर एंड फारगेट' पर काम करती है, जिसका लक्ष्य दुश्मन को काइनेटिक एनर्जी से ट्रैक कर बर्बाद करने का होता है।
मिसाइल की ये खासियत
दुश्मनों की नींद उड़ा रही है मिसाइल की ये खासियत
मिसाइल का क्रूज 15 किमी ऊंचाई तक बढ़ सकता है। यह कम से कम 10 मीटर उड़ सकता है।
ये परमाणु सक्षम मिसाइल 200-300 किलोग्राम वजन ढोने में सक्षम है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मिसाइल तीन गुना तेज है, चार गुणा अधिक सटीक है और दुश्मन के मिसाइलों की तुलना में नौ गुना अधिक प्रभावशाली है।
ब्रह्मोस भारतीय सशस्त्र बलों की सेवा में शामिल होने वाला ये पहला सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।
उपलब्धि
ब्रह्मोस हुआ पास
आईएनएस राजपूत पहला जहाज था जिस पर मिसाइल को 2005 में पहली बार शामिल किया गया था।
भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई प्लेटफार्म पर ब्रह्मोस एयर-लॉन्च का परीक्षण किया गया था।
भारतीय सेना ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के तीन रेजिमेंटों (हवा, जमीन और समुंद्र) को शामिल किया है।