देश के अल्पसंख्यक समुदाय में सीएए और एनआरसी कानूनों को लेकर नाराजगी बरकरार है। इसके विरोध में शाहीन बाग और जामिया मिल्लिया इस्लामिया सहित अनेक जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस मुद्दे पर देश के तनावपूर्ण माहौल के बीच सोशल मीडिया पर कथित रूप से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक भाषण वायरल हो रहा है, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय को रूस के कानूनों को मानने, रूसी भाषा सीखने या किसी दूसरे देश में चले जाने के लिए कहा गया है।
फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पुतिन के भाषण के रूप में जो फेक मेसेज वायरल हो रहा है, वह इस प्रकार है-
व्लादिमीर पुतिन का अब तक का सबसे संक्षिप्त भाषण, आपको इसे अवश्य पढ़ना चाहिए और इस पर विचार अवश्य करना चाहिए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी संसद के संबोधन में रूस के अल्पसंख्यक तनाव पर कहा
रूस में रूसियों की तरह रहें। कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय जो कहीं से हो, यदि उसे रूस में रहना है, यहां पर काम करना है, आहार लेना है तो उसे रूसी भाषा में बोलना होगा। रूस के कानूनों का सम्मान करना होगा। यदि वे शरीयत नियमों को वरीयता देना पसंद करते हैं एवं मुस्लिम जीवन शैली में जीना चाहते हैं तो उन्हें हमारा सुझाव है कि वे उन स्थानों पर चले जाएं जहां यह राजकीय कानून है। रूस को अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की आवश्यकता नहीं है, अल्पसंख्यकों को रूस की आवश्यकता है। हम किसी तरह का विशेषाधिकार उन्हें नहीं देते और न ही हम अपने कानूनों में ऐसे बदलाव लायेंगे जो उनकी अपेक्षाओं पर खरे उतरते हों। चाहे वो ऊंची से ऊंची आवाज में इसे ‘भेदभाव’ कहें।
रूसी संसद के राजनेताओं ने पुतिन का खड़े होकर 5 मिनटों तक अभिवादन किया।रूसी संस्कृति की अवमानना हमें किसी भी रूप में स्वीकार नहीं है। यदि एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहना है, तो हमें अमेरिका, इंग्लैंड, हॉलैंड और फ्रांस में हुए आतंकी हमलों से सीख लेने की आवश्यकता है। मुसलमान उन देशों का अधिग्रहण कर रहे हैं। लेकिन वे रूस के साथ ऐसा नहीं कर पाएंगे। रूसी रिवाजों और परंपराओं का मुकाबला असंस्कारी और आदिम मुस्लिम शरीयत नियमों के साथ नहीं किया जा सकता। जब भी यह सम्माननीय वैधानिक निकाय नए नियमों के सृजन का विचार करे, तो उसे रूस के राष्ट्रीय हितों को प्रथम वरीयता में रखना है, यह ध्यान में रखते हुए कि मुस्लिम अल्पसंख्यक रूसी नहीं हैं।