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Facebook: मजदूर से धोखाधड़ी मामले में हाईकोर्ट पहुंची फेसबुक इंडिया, उपभोक्ता आयोग के फैसले को दी चुनौती

Fri, 16 Sep 2022 04:37 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, नागपुर

सार

आयोग ने फेसबुक इंडिया को एक व्यक्ति को ऑनलाइन खरीदे गए उत्पाद की डिलीवरी न करने के साथ 599 रुपये का भुगतान कर देने और मानसिक पीड़ा के लिए 25000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock
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विस्तार
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मजदूर से फेसबुक पर ऑनलाइन विज्ञापन के जरिए हुई धोखाधड़ी मामले में फेसबुक इंडिया ने उपभोक्ता निवारण आयोग के फैसले को दी चुनौती है और बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दरअसल, एक व्यक्ति ने फेसबुक पर विज्ञापन देखकर एक उत्पाद खरीद लिया था। उसके भुगतान के बावजूद डिलीवरी नहीं हुई। 

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इसके बाद पीड़ित व्यक्ति ने उपभोक्ता निवारण आयोग में शिकायत दी थी जिसके बाद धोखाधड़ी वाले विज्ञापन के लिए फेसबुक इंडिया को 25,599 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति मनीष पितले की नागपुर पीठ ने गुरुवार को जून, 2022 में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा पारित आदेश के खिलाफ फेसबुक इंडिया ऑनलाइन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और मेटा द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई की। आयोग ने कंपनियों को एक व्यक्ति को ऑनलाइन खरीदे गए उत्पाद की डिलीवरी न करने पर 599 रुपये का भुगतान कर देने और मानसिक पीड़ा के लिए 25,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था।
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कस्टमर केयर नंबर पर कॉल किया तो ठग लिए सात हजार
आयोग ने एक दिहाड़ी मजदूर त्रिभुवन भोंगडे की शिकायत पर कंपनी को हर्जाने देने का आदेश पारित किया था, भोंगड़े ने दावा किया था कि उन्होंने फेसबुक पर एक मरिया स्टूडियो द्वारा 599 रुपये में नाइके के जूते बेचने का विज्ञापन देखा था। उन्होंने जूते के लिए एक ऑर्डर दिया था और सितंबर 2020 में अपने डेबिट कार्ड का उपयोग करके भुगतान किया था, लेकिन उन्हें जूते कभी नहीं मिले। उन्होंने आगे दावा किया कि उन्होंने मरिया स्टूडियोज के कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करने की कोशिश की, जहां एक व्यक्ति ने उनसे 7,568 रुपये और ठग लिए।

एनसीपीसीआर ने 'गैरकानूनी प्रथाओं' में शामिल एनजीओ को फंडिंग के लिए अमेजन इंडिया से मांगा स्पष्टीकरण 
शीर्ष बाल अधिकार निकाय एनसीपीसीआर ने शुक्रवार को अमेजन इंडिया को एक नोटिस जारी कर "गैरकानूनी प्रथाओं" में शामिल एक एनजीओ को कथित रूप से वित्त पोषित करने के लिए उससे स्पष्टीकरण मांगा। इस मामले पर अमेजन इंडिया की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

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