दिल्ली विधानसभा ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि फेसबुक इंडिया के वाईस प्रेसिडेंट अजीत मोहन को बतौर गवाह समन भेजा गया है और उनके खिलाफ न तो कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और न ही ऐसी कोई इरादा है। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में दिल्ली विधानसभा सचिव ने कहा है कि अजीत मोहन को बतौर गवाह पेश होने के लिए कहा गया है हालांकि मोहन चुप्पी साधे रखने के अधिकार का दावा नहीं कर सकते। हलफनामे में कहा गया है कि यह कार्यवाही बहुत ही पारदर्शी तरीके से होगी। कार्यवाही का प्रसारण किया जाएगा, लिहाजा इसे लेकर किसी को आशंकित होने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली विधानसभा के शांति और सद्भाव समिति ने फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट अजीत मोहन को समन भेजा था। गत फरवरी में दिल्ली में हुए दंगों में फेसबुक की सहभागिता का कथित तौर पर आरोप मड़ते हुए समिति ने समन जारी किया था। मोहन ने समन भेजे जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिस पर 23 सितंबर को विधानसभा सचिव को नोटिस जारी किया था। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि जब तक इस मसले का निपटारा नहीं हो जाता तब तक पैनल की कोई बैठक नहीं होगी। इसी नोटिस के जवाब में विधानसभा ने हलफनामा दाखिल किया है।
पिछली सुनवाई में अजीत मोहन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी ने कहा था कि पैनल को फेसबुक इंडिया के अधिकारी को समन करने का कोई अधिकार नहीं है। साल्वे ने कहा था कि पैनल द्वारा यह कहना कि पेश नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी, यह सीधे तौर पर धमकी है। अगर वाइस प्रेसिडेंट को जबरन बोलने के लिए मजबूर किया जाता है तो यह अनुच्छेद 19 और 21 का सीधे तौर पर पर उल्लंघन है।
वहीं रोहतगी का कहना था कि 31 अगस्त को पैनल के चेयरमैन राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली दंगों में फेसबुक की सहभागिता की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि 18 सितंबर को जारी समन में यह कहा गया है कि समिति के समक्ष उपस्थित न होने पर उसे विशेषाधिकार हनन माना जाएगा और कार्रवाई की जाएगी। रोहतगी का कहना था कि ऐसा करना समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।