भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग यानी पोत परिवहन मंत्रालय ने अपने कर्मियों के लिए आदेश जारी किया है कि अब किसी को भी यात्रा भत्ता नहीं मिलेगा। हालांकि यह बात लॉकडाउन के संदर्भ में कही गई है।
आदेश में सरकारी गाइडलाइंस का हवाला देते हुए बताया गया है कि लॉकडाउन में किसी को भी यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा। यदि किसी ने लिया है तो वापस करना पड़ेगा।
केंद्र सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि अब सभी विभागों में यह व्यवस्था की जा रही है कि आगामी तीन-चार महीनों तक अधिकांश विभागों के सरकारी खर्च पर रोक लगा दी जाए।
ओटीए, एफटीई, विभाग के छोटे कामकाज और आईटी से जुड़े किसी योजना पर कुछ खर्च करना है, तो उसके लिए विभागाध्यक्ष की मंजूरी लेनी पड़ेगी। नए बिलों के अलावा घरेलू यात्रा खर्च को भी पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
हरियाणा सरकार के एक अधिकारी बताते हैं कि अभी खर्च कटौती की लिस्ट तैयार हो रही है। अमूमन आप यह मान कर चलें कि डीए, यात्रा भत्ता, एडवांस और पुराने बिलों का भुगतान आदि कम करने या उन्हें कुछ समय के लिए रोकने पर विचार हो रहा है।
हालांकि इस मामले में केंद्र सरकार को अनुसरण किया जाएगा। हर माह एक दिन का वेतन या उसका 10-15 फीसदी हिस्सा प्रतिमाह काटा जा सकता है। हरियाणा के शिक्षा विभाग में तो पहले ही स्टाफ का दस फीसदी हिस्सा काटा जा चुका है।
केंद्र सरकार में वित्त विभाग के एक अधिकारी ने कहा, अधिकांश राज्यों में सरकारी कर्मियों का वेतन या भत्तों पर कोरोना का असर देखने को मिलेगा। इस संदर्भ में एक गोपनीय पत्र राज्यों को भेजा जा रहा है।
इसमें खर्च को कम कैसे किया जाए और कितने समय तक कर्मियों के वेतन भत्ते रोके जाएं, इन बातों का उल्लेख है। ये पत्र केवल एक सलाह के तौर पर रहेगा। इसमें यह भी लिखा होगा कि स्थिति सामान्य होने के बाद किस तरह के कर्मियों की रोकी गई सुविधाओं और वेतन भत्तों को वापस किया जाए।