बाघों का ख्याल रखने के लिए अब उनपर ड्रोन्स और जीपीएस से नजर रखी जाएगी। कई दिनों तक बाघों का पता नहीं चलने की वजह से परेशान रहने वाले राजस्थान के सरिसका टाइगर्स रिजर्व में ड्रोन्स और जीपीएस का इस्तेमाल किया जाएगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक टाइगर रिजर्व के डिप्टी फॉरेस्ट ऑफिसर(डीएफओ) बालाजी काइरी ने कहा कि बाघों पर नजर रखने के अलावा हम यह भी देखें पाएंगे कि गार्ड्स तैनात किए गए स्थान पर मौजूद हैं या नहीं। ट्रायल अभी रिजर्व के दो रेंज में चल रहा है।
उन्होंने बताया कि बाघों का अक्सर कई दिन तक कुछ पता नहीं चल पाता। इससे बाघों के स्वास्थ्य की स्थिति चेक करने में मुश्किल होती है। रिजर्व में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां वाहन जाना कठिन है। इसलिए बाघों का पता नहीं चलता कि वे किसी पुलिया के नीचे हैं या किसी मांद में हैं।