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26/11 मुंबई हमला: तमाम परिवारों के दिलों में जख्म अब भी हरे, गुनहगार तहव्वुर के लिए सबने मांगी फांसी

Fri, 11 Apr 2025 05:10 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

26/11 आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता तहुव्वर राणा अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया जा चुका है। आरोपी राणा के प्रत्यार्पण के साथ ही लोगों में आक्रोश का माहौल है। तमाम परिवारों के दिलों में जख्म अब भी हरे है। सभी लोग गुनहगार तहव्वुर को उसके कुकर्मों की सजा दिलाने के लिए फांसी की मांग कर रहे है।    

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तहव्वुर राणा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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26/11 मुंबई हमले का आरोपी तहव्वुर राणा के प्रत्यार्पण साथ ही देशभर में आक्रोश का महौल है। तमाम परिवार के लोग गुनहगार राणा के लिए मौत की सजा की मांग रहे है। आतंकी अजमल कसाब ने जिस 9 साल की बच्ची देविका को गोली मारी थी उसी ने कोर्ट में उसे पहचानकर फांसी तक पहुंचाया था। 25 साल की हो चुकीं देविका रोटावन ने राणा के प्रत्यर्पण को भारत की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि अब राणा की बारी है। उसे भी फांसी दी जानी चाहिए।

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साथ ही देविका ने हेडली जैसे दूसरे साजिशकर्ताओं को बेनकाब करने और उन्हें सजा दिए जाने की भी मांग की। देविका को अब भी आतंकी हमले का एक-एक पल याद है। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर फंसीं देविका के पैर में गोली लगी थी। प्रमुख गवाह रहीं देविका ने मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पाकिस्तानी कसाब की पहचान की थी। उसी के आधार पर फांसी दिलाने में मदद मिली थी। देविका ने कहा, राणा के प्रत्यर्पण के लिए सरकार को धन्यवाद देना चाहती हूं। राणा को न्याय के लिए भारत लाए जाने से भारत में आतंकवाद के खात्मे की शुरुआत हो गई है।

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उस दिन को भूल पाना मुश्किल
हमले वाली रात को याद करते हुए देविका ने कहा, मैंने कसाब को हाथ में बड़ी बंदूक लिए यात्रियों पर गोलियां चलाते देखा था। उसके साथ एक और आतंकी अबू इस्माइल भी गोलियां चला रहा था। मैंने कई शव और घायल यात्री देखे। मैं उस समय सिर्फ नौ साल की थी। मुझे नहीं पता था कि मेरी आंखों के सामने क्या हो रहा था। मेरे पैर में गोली लगी थी और मैं बेहोश हो गई। मुझे पास के सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया और बाद में जेजे अस्पताल में मेरे पैर की सर्जरी की गई। मैं उस दिन को कभी नहीं भूल पाऊंगी।

शहीद तुकाराम के भाई बोले जल्द हो राणा को फांसी
पाकिस्तानी आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए मुंबई पुलिस के सब इंस्पेक्टर और अशोक चक्र विजेता तुकाराम ओंबले के भाई एकनाथ ओंबले ने राणा के प्रत्यर्पण को देश के लिए बड़ा दिन बताते हुए उसे फांसी दिए जाने की मांग की। तुकाराम ओंबले ने ही आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा था और इस दौरान वह शहीद हो गए थे। उनकी इस बहादुरी के लिए उन्हें सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। तुकाराम के भाई एकनाथ ने कहा, मुंबई हमले में कई मासूम लोग और पुलिसकर्मी मारे गए थे। वह एक दर्दभरी रात थी। राणा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड डेविड हेडली का करीबी था। राणा को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि पाकिस्तान दोबारा ऐसी हिमाकत करने से पहले दो बार सोचे। अजमल कसाब को फांसी देने में हुई देरी को भी हमने झेला, क्योंकि उसने पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब किया। 
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शहीद मेजर संदीप के पिता बोले-हेडली भी गिरफ्तार हो
आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए एनएसजी कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता ने कहा कि राणा का प्रत्यर्पण भारत की कूटनीतिक सफलता है। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा देश की सुरक्षा करते हुए शहीद हुआ, उसने अपना फर्ज निभाया। हमले के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। शहीद मेजर के पिता के उन्नीकृष्णन ने कहा, अमेरिका की सहमति के बाद राणा को वापस लाने की बात चल रही थी, वह केवल एक कड़ी है। यह कूटनीतिक सफलता है, जो भारत को लंबे समय के बाद मिली है। यह कोई अंतिम बात या बड़ी उपलब्धि नहीं है। इसमें बहुत सी परतें हैं, जिन्हें हमें हासिल करना है। जब डेविड हेडली भारत में था, तब राणा ने 231 कॉल किए थे। सारे सबूत यहां मौजूद हैं। राणा एक पढ़ा लिखा व्यक्ति है, जो अकेले ही सब कुछ संभाल सकता है। देखते हैं इससे क्या निकलता है। के उन्नीकृष्णन ने कहा कि राणा जैसे लोग सिर्फ मोहरा हैं, जो पैसे के लिए काम करते हैं।

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