फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

'मैंने पैसे चुराए, ये कहानी बंद करके प्लीज पैसा लेलो', आज फिर बोला माल्या

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Thu, 06 Dec 2018 09:21 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विजय माल्या

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने आज फिर कहा है कि उनके प्रत्यर्पण के फैसले को लेकर कई तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। जो कि एक अलग मामला है और वह पूरा पैसा लौटाने को तैयार हैं। यह बात उन्होंने ट्वीट में कही। उन्होंने आगे कहा कि वह इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं कि उनके प्रत्यर्पण का निर्णय या दुबई से हालिया प्रत्यर्पण या फिर समझौता प्रस्ताव आपस में कैसे जुड़े हैं। 



माल्या ने कहा, "जहां कहीं भी मैं फिजिकली उपस्थित हूं, मेरी अपील है कृपया ले लें। मैं इस बात को खत्म करना चाहता हूं कि मैंने पैसा चुराया है।" भारतीय बैंकों का अरबों रुपये लेकर ब्रिटेन भागे माल्या का ये बयान क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण के चंद घंटे बाद ही आया है। माल्या के प्रत्यर्पण पर फैसला चार दिन बाद आने वाला है। किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख ने बुधवार को सोशल मीडिया के जरिये भारत सरकार से इस पेशकश को स्वीकार करने का निवेदन किया। वह अभी ब्रिटेन में जमानत पर बाहर है।

 



बताते चलें कि भारत का करीब 9000 करोड़ रुपये लेकर देश से भागे 62 वर्षीय माल्या के प्रत्यर्पण पर 10 दिसंबर को ब्रिटिश कोर्ट द्वारा फैसला सुनाया जाना है। हालांकि कारोबारी ने कहा कि प्रत्यर्पण की कार्यवाही का मामला अलग है। माल्या प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटेन में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। कारोबारी का कहना है कि नेताओं और मीडिया ने उसे गलत तरीके से ‘डिफॉल्टर’ के रूप में पेश किया है।


इससे पहले बुधवार को उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि वह अपराधी नहीं हैं। उन्हें भारत में अपराधी माना जा रहा है, तीन दशक तक किंगफिशर ने भारत में कारोबार किया है। इस दौरान उन्होंने कई राज्यों की मदद भी की है। उन्होंने कहा कि किंगफिशर एयरालाइंस के लगातार घाटे में जाने से उन्हें दुख है। वह सभी बैंकों का मूलधन देने के लिए तैयार हैं लेकिन ब्याज नहीं दे सकते। बैंकों को इसे लेना चाहिए।


2016 से बकाया राशि के निपटान की पेशकश


विजय माल्या ने बुधवार को एक के बाद एक ट्वीट कर दावा किया कि वह 2016 से ही बैंकों की बकाया राशि चुकाने की पेशकश कर रहा था। उसने कहा कि विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में वृद्धि के कारण किंगफिशर एयरलाइंस का घाटा बढ़ता गया और बैंकों का पैसा इसी में जाता रहा।

और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next