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ट्रंप टैरिफ से निर्यातक परेशान: सरकार से की सहायता की मांग; कारोबारियों ने पीयूष गोयल के समक्ष उठाया मुद्दा

Mon, 04 Aug 2025 01:51 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मुंबई में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक के दौरान कुछ निर्यातकों ने उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) जैसी योजनाओं की मांग की। निर्यातकों ने ट्रंप के टैरिफ के कारण अमेरिकी बाजार में आने वाली समस्याओं के बारे में बताया और उद्योगों को वित्तीय सहायता की जरूरत को रेखांकित किया।
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भारत अमेरिका (प्रतीकात्मक) - फोटो : एडॉब स्टॉक
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विस्तार
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खाद्य, समुद्री उद्योग और कपड़ा कारोबार समेत विभिन्न क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से लगाए गए 25 प्रतिशत के टैरिफ के कारण बढ़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार से वित्तीय सहायता और किफायती ऋण की मांग की है।

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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुंबई में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक के दौरान कुछ निर्यातकों ने उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) जैसी योजनाओं की मांग की। निर्यातकों ने ट्रंप के टैरिफ के कारण अमेरिकी बाजार में आने वाली समस्याओं के बारे में बताया और उद्योगों को वित्तीय सहायता की जरूरत को रेखांकित किया। अधिकारियों के मुताबिक, मंत्री ने सुझाव दिया है कि निर्यातक समुदाय अपने सुझाव लिखित रूप में भेजें।

निर्यातकों का कहना है कि भारत में ब्याज दरें आठ से 12 प्रतिशत या उससे भी अधिक होती हैं जबकि प्रतिस्पर्धी देशों में ब्याज दर बहुत कम है। उदाहरण के लिए चीन में केंद्रीय बैंक की दर 3.1 प्रतिशत, मलेशिया में तीन प्रतिशत, थाईलैंड में दो प्रतिशत और वियतनाम में 4.5 प्रतिशत है। निर्यातकों का कहना है कि परिधान और झींगा जैसे क्षेत्रों की स्थिति अच्छी नहीं है।
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अपने ऑर्डर रद्द करने लगे हैं अमेरिकी खरीदार
भारतीय कारोबारियों के मुताबिक, अमेरिकी खरीदारों ने ऑर्डर रद्द करना या रोककर रखना शुरू कर दिया है। आने वाले महीनों में, इसका असर अमेरिका को भारत के निर्यात पर पड़ सकता है, और निर्यात में गिरावट के कारण, नौकरियां जा सकती हैं।
 
परिधान, चमड़ा समेत कई क्षेत्रों पर प्रतिकूल असर
इस हफ्ते घोषित शुल्क 7 अगस्त से लागू होगा। इस उच्च टैरिफ से व्यापक निर्यात वाले क्षेत्रों जैसे कपड़ा/परिधान (10.3 अरब डॉलर), रत्न एवं आभूषण (12 अरब डॉलर), झींगा (2.24 अरब डॉलर), चमड़ा एवं जूते-चप्पल (1.18 अरब डॉलर), रसायन (2.34 अरब डॉलर), और विद्युत एवं यांत्रिक मशीनरी (लगभग नौ अरब डॉलर) पर सबसे ज्यादा पड़ेगा। भारत के चमड़ा और परिधान निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक है।
 
कपड़ा मंत्रालय इसी हफ्ते प्रमुख कारोबारियों से करेगा मुलाकात
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह इस हफ्ते उद्योग जगत के हितधारकों से मुलाकात करेंगे और भारत पर अमेरिकी टैरिफ के संभावित असर पर विचार-विमर्श करेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बैठक में पिछले महीने हस्ताक्षरित ब्रिटेन-भारत एफटीए से भारत के कपड़ा क्षेत्र को होने वाले संभावित लाभ पर भी चर्चा होगी। सरकार और उद्योग 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के कपड़ा निर्यात लक्ष्य को हासिल करने और टैरिफ के संभावित असर को घटाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी घोषणा के मद्देनजर घरेलू कपड़ा निर्यातकों को समर्थन देने के लिए किसी भी उपाय पर चर्चा करना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन सरकार इस समय उद्योग जगत की प्रतिक्रिया जानना चाहती है।

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