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एक्सप्लेनर: चुनाव आयोग का वोटर लिस्ट सिस्टम, ईसीआईनेट-ईआरओनेट कैसे काम करते हैं? समझें

Fri, 02 Oct 2026 05:24 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा मतदाता सूची प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म ईआरओनेट और ईसीआईनेट चर्चा में है। पूरी प्रक्रिया को छह सवालों से समझिए। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/आईस्टॉक
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विस्तार
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मतदाता सूची तैयार करने की कानूनी जिम्मेदारी किसकी है? मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन का अधिकार इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) के पास होता है। ईआरओ एसडीएम रैंक के अधिकारी होते हैं। नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन करने, दावे-आपत्तियां सुनने और अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत होते हैं। सॉफ्टवेयर केवल एक डिजिटल साधन है। अंतिम फैसला कानूनी रूप से ईआरओ का ही होता है।
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ईआरओनेट क्या है और इसे क्यों शुरू किया गया था?
इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफसर नेटवर्क (ईआरओनेट) को राज्यों के 36 अलग-अलग पुराने डाटाबेसों को हटाकर एक केंद्रीय व्यवस्था के रूप में पेश किया गया था। यह ईआरओ के लिए निर्णय लेने में मदद करने वाले सॉफ्टवेयर की तरह काम करता है। जैसे कि जनसांख्यिकी के आधार पर संभावित डुप्लीकेट नामों को फ्लैग करना। जिसे बाद में ईआरओ हटाते हैं।

ईसीआईनेट क्या है, यह ईआरओनेट से अलग है?
ईसीआईनेट को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया। मतदाता पहचान पत्र डाउनलोड करना, आवेदन ट्रैक करना, पोलिंग स्टेशन खोजना और वोटर लिस्ट में संशोधन जैसी सभी सेवाएं अब इसी के तहत आती हैं। ईआरओनेट के सारे चुनावी रोल संबंधी कामकाज को भी ईसीआईनेट में समाहित कर दिया गया। चुनाव के दिन हर 2 घंटे में मतदान प्रतिशत दर्ज करना और संकलन में उपयोग होता है। 
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एसआईआर के दौरान कैसे काम करता है?
चुनाव आयोग मतदाता सूची का गहन या सारांश पुनरीक्षण आदेशित करता है। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) जमीनी स्तर पर दस्तावेज एकत्र व सत्यापित करते हैं। सिस्टम पुरानी और वर्तमान मतदाता सूची का मिलान करते समय विसंगतियों को स्वतः पहचानता है, जैसे रिश्तेदार के नाम में अंतर, माता-पिता और बच्चे की उम्र में अस्वाभाविक अंतर, या उम्र बढ़ने का असंगत क्रम। 

ईसीआईनेट के कामकाज पर मुख्य विवाद क्या है? मुख्य विवाद इस बात पर है कि क्या सॉफ्टवेयर का डिजाइन ईआरओ को कानून के तहत मिले उनके स्वतंत्र अधिकारों और निर्णयों को सीमित कर रहा है।
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आयोग का पक्ष क्या है व समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? चुनाव आयोग ने कहा है कि ईआरओ और जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) कानून के तहत मिली अपनी वैधानिक शक्तियों का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं और अनधिकृत छेड़छाड़ रोकने के लिए कड़े डेटा-सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं।
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