कोरोना की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
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सरकार द्वारा चौथे राष्ट्रीय सीरो सर्वे के आंकड़े जारी किये जाने के बाद विशेषज्ञों ने राय दी है कि कोरोना महामारी और उस पर एंटीबॉडी के असर को गहराई से समझने के लिए यह काफी नहीं बल्कि बड़ी आबादी पर सर्वे किया जाना चाहिए।
मुंबई के नानावती मैक्स सुपर स्पेशनिटी अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन व संक्रमण विभाग के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ राहुल ताम्बे ने कहा, चौथे सीरो सर्वे में 28,975 नागरिकों और 7252 स्वास्थ्य कर्मियों को शामिल किया गया है। यह काफी नहीं है, बीमारी को अच्छी तरह समझने के लिए सर्वे का दायरा बढ़ाने की जरूरत है। हमें संक्रमण के प्रसार को लेकर गंभीर होने की जरूरत है क्योंकि यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि कोरोना के वैरिएंट किस तेजी से फैल रहे हैं और इन पर एंटीबॉडी का कितना असर होता है।
एंटीबॉडी का मतलब यह नहीं कि संक्रमण नहीं होगा
डॉ ताम्बे ने कहा, शरीर में एंटीबॉडी मौजूद होने का यह मतलब कतई नहीं है कि संक्रमण की चपेट में नहीं आ सकते। हां यह जरूर है कि लक्षण अधिक गंभीर नहीं होंगे। हालांकि आईसीएमआर यह भी दावा कर चुका है कि एंटीबॉडी होने पर संक्रमित होने वालों की हालत नहीं बिगड़ेगी।
टीकाकरण बहुत जरूरी
वोकहार्ड अस्पताल की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ सोनम सोलंकी ने कहा, इन सबके बीच टीकाकरण सबसे सशक्त हथियार है। कोरोना को मात देने के लिए जल्द से जल्द सभी का टीकाकरण होना चाहिए। टीका लगने से इस बीमारी से मरने वालों की संख्या कम होगी। इसके साथ सावधानी बरतने की बहुत जरूरत है।