कोरोना काल में फूल किसानों का भारी घाटा हुआ। शादियों के कार्यक्रमों पर पूरी तरह रोक लग जाने के कारण फूलों की मांग पूरी तरह खत्म हो गई। इससे तैयार फूलों को बेचने के लिए कहीं जगह नहीं मिला। इससे निराश किसानों ने भविष्य की अनिश्चितता से बचने के लिए खेतों में फूलों की जगह अन्य फसलों को बोना शुरू कर दिया।
इससे बाजार में गेंदा फूलों की उपलब्धता पूरी तरह खत्म हो गई। इससे बाजार के खुलने के बाद एक बार गेंदा के फूलों की कीमत 200 रूपये प्रति किलो तक पहुंच गई। हालांकि, जल्दी ही इसे कोलकाता और बंगलौर के बाजारों से मंगवाकर पूरा किया गया।
हर एकड़ पर 10 लाख तक का नुकसान
फूल बाजार में नरमी के कारण फूल किसानों को इस साल भारी नुकसान उठाना पड़ा। अनुमान है कि प्रति एकड़ फूलों के खेतों को लगभग 10 लाख रूपये तक का नुकसान पिछले छः महीने में हुआ है। गाजीपुर फूल मंडी में 422 दुकानें हैं। हर दुकान पर लगभग 15-20 लोगों का सीधा रोजगार जुड़ा हुआ है।
फूलों की माला बनाने वाली महिलाएं भी यहां 300-500 रुपये तक औसतन कमाई कर लेती हैं। इन्हें प्रति माला बनाने का एक रुपये, और बीस माला की एक कौड़ी (गुच्छे) के लिए बीस रुपये मेहनताना मिलता है। लेकिन पिछले छह महीने से इनकी कमाई पूरी तरह ठप पड़ी हुई हैं। अब इनकी निगाहें भी नवरात्रों पर टिकी हुई हैं।
गाजीपुर फूल मंडी में कोलकाता, बंगलूरू, केरल, हैदराबाद, थाईलैंड और चीन से फूल मंगवाए जाते हैं और यहां से लखनऊ, चंडीगढ़, जयपुर, पटना जैसे बाजारों को फूलों का निर्यात किया जाता है। इसकी वजह से ट्रांसपोर्ट के हजारों व्यापारियों का व्यापार भी इन्हीं पर टिका हुआ है। अब इन व्यापारियों को भी नवरात्रोंं से भारी उम्मीद है।