प्रवक्ता ने कहा, स्वर्णिम चतुर्भुज और डायगोनल की पटरियां इस तरह से अपग्रेड की जा रही हैं कि उन पर 130 किमी से लेकर 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से रेलगाड़ियां संचालित की जा सकें। जो रेलगाड़ियां 130 से लेकर 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी उनमें वातानुकूलित कोच लगाए जाएंगे।
गैर वातानुकूलित कोच ऐसी रेलगाड़ियों में लगे रहेंगे, जो 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं। राजधानी, शताब्दी और दूरंतो जैसी ट्रेनें 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं। प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की ट्रेनों के कोच 130 किलोमीटर प्रति घंटा इससे अधिक गति पर चलने के लिए उपयुक्त हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी ट्रेनों में टिकट की कीमत वहनीय होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे गलत तरीके से नहीं समझा जाना चाहिए कि सभी गैर वातानुकूलित कोच को एसी कोच बनाया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार नए एसी कोच सस्ते होंगे और उनकी टिकट दर एसी थ्री और स्लीपर कोच के बीच की होगी।
प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान में 83 बर्थ वाले कोच को डिजाइन किया जा रहा है। इस साल इस तरह के 100 कोच बनाने की योजना है और अगले साल 200 कोच बनाए जाएंगे। इन कोचों का मूल्यांकन किया जाएगा और इन कोचों के संचालन से मिलने अनुभव के आधार पर आगे की प्रगति होगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे एक एसी कोच का प्रोटोटाइप कपूरथला के रेल कोच फैक्टरी में तैयार किया जा रहा है और कुछ हफ्ते में इसे तैयार हो जाना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नए कोच में टिकट दर यात्रियों के लिए वहनीय हो, सुविधा और आराम कई गुना हो जाए और यात्रा के समय में काफी कटौती हो जाए।