पाक रेंजर्स को सूचना देकर बीएसएफ वाले निश्चिंत हो गए कि अब कोई चिंता नहीं
बीएसएफ का दावा है कि उन्होंने सरकंडा उखाड़ने की सूचना पाक रेंजर्स को दे दी थी। महज इससे बीएसएफ वाले निश्चिंत हो गए कि अब चिंता की कोई बात नहीं है। पाक की ओर से कोई फायरिंग नहीं होगी। यह सोचकर निहत्थे जवानों को इंडो-पाक सीमा पर भेज दिया गया। करीब साढ़े दस बजे पाकिस्तान की 22 चेनाब रेंजर्स शोकट पोस्ट से जब बीएसएफ जवानों पर फायरिंग होने लगी तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। पहले राउंड में शोकट पोस्ट से गोलियों की बौछार हुई और उसके बाद रेंजर्स व बैट दस्ते आईबी पार कर भारतीय सीमा में दौड़ने लगे। तब तक फायरिंग चलती रही। जिन जवानों को सरकंडा उखाड़ने के लिए लगाया गया थ, वे अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिप गए। दो गार्ड, जिनके पास हथियार थे, वे भी कहीं से छिप-छिप कर फायर करते रहे। चूंकि इस अवस्था में सभी जवान अलग-थलग पड़ गए थे और इसी वजह से पाक रेंजर्स के हाथ हवलदार नरेंद्र सिंह लग गया। यहां पर भी एक सवाल खड़ा होता है कि पाक रेंजर्स व बैट दस्ता हवलदार को जब ले जा रहा था तो भारतीय सीमा की ओर से उन पर कोई फ़ायरिंग नहीं हुई।वे अपनी सीमा में हवलदार को ले गए और उसे मारकर उसकी देह को क्षत-विक्षत कर दिया।इसके बाद वे नरेंद्र के शव को बॉर्डर पर फेंक कर चले गए।उस वक्त तक बीएसएफ सचेत हो चुकी थी, सर्च आॅपरेशन चल रहा था।इसके बाद भी किसी को भनक नहीं लगी कि कब और कैसे नरेंद का शव बॉर्डर पर फेंका दिया गया।
पाक सेना, आईएसआई और लश्कर के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है बैट
एलओसी पर पाकिस्तान की ओर से बॉर्डर एक्शन टीम की गतिविधियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं। पाक सेना, आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर द्वारा बैट दस्ता तैयार किया जाता है। इन्हें सिरफिर कमांडो भी कहते हैं। एक बैट दस्ते में पांच-छह कमांडो होते हैं। इन्हें सेना के कमांडो जैसी ट्रेनिंग मिलती है। बैट दस्ते को जो टारगेट मिलता है, उसे पूरा करने के लिए वे महीनों तक इंतजार करते हैं। खराब मौसम हो या फिर कोई अन्य विपरित परिस्थिति, ये हर सूरत में अपना टारगेट पूरा करते हैं। जब भी बीएसएफ या सेना का कोई जवान अपनी पोस्ट या गश्ती दल से इधर-उधर होता है तो ये उसे अपना निशाना बना लेते हैं। कई बार भारतीय जवान पीने का पानी लाने, नहाने के लिए जाने या कभी ऐसी स्थिति बनती है कि समूह में से कोई जवान थोड़ा दूर हो जाता है तो बैट उस पर फायरिंग कर देती है। बैट के सदस्यों को एक साल में चार-पांच बड़े टारगेट मिलते हैं। इनके पास एके-47, 9.9 एमएम की पिस्टल, हैंड ग्रेनेड और खुखरी होती है। अगर ये भारतीय जवानों के हाथ मारे जाते हैं तो इन्हें पाकिस्तान में शहीद का दर्जा मिलता है और साथ में इनके परिजनों को 10-12 लाख रुपये की तय राशि का भुगतान भी किया जाता है।