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Excise Policy Vs Operation Lotus: क्या भ्रष्टाचार के मुद्दे से ध्यान हटाना चाहती है आप? कितने सच हैं ये आरोप

सार

Excise Policy Vs Operation Lotus: दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि दिल्ली के साथ-साथ पूरे देश की जनता देख रही है कि अरविंद केजरीवाल सरकार के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और इन्हीं भ्रष्टाचार के मामलों में उसके पंजाब से लेकर दिल्ली तक के मंत्री जेल में हैं...
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Excise Policy Vs Operation Lotus: Arvind Kejriwal and Manish Sisodia - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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दिल्ली की शराब नीति में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा लगातार मनीष सिसोदिया पर हमलावर है। वह नए-नए तथ्यों को सामने रखकर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से इस पर सफाई मांग रही है। भाजपा के इस हमले से आम आदमी पार्टी की ‘ईमानदार सरकार’ वाली छवि पर चोट पहुंचती दिख रही थी, लेकिन इसी बीच आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर उसके विधायकों को खरीदकर दिल्ली सरकार को गिराने की कोशिश करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। इससे पूरी चर्चा का केंद्र बदल गया है। बड़ा प्रश्न यह है कि ऑपरेशन लोटस के आरोप में कोई सच्चाई है, या यह केवल बहस का मुद्दा बदलने की रणनीति है? यदि ऐसा है तो अरविंद केजरीवाल की यह कोशिश कितनी कारगर साबित होती दिख रही है?

आम आदमी पार्टी का आरोप

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बुधवार को आरोप लगाया है कि पहले मनीष सिसोदिया के घर-ऑफिस पर सीबीआई के छापे मारकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई और उन्हें भाजपा ज्वाइन करने पर सभी आरोप वापस लेने की बात कही गई, और अब उनकी पार्टी के विधायकों को करोड़ों रुपयों की रिश्वत देने की पेशकश की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया और कहा कि इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए।

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौऱभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि उनके विधायकों को पार्टी तोड़ने के लिए भाजपा की तरफ से 20-25 करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्ष शासित हर राज्य में विपक्षी दलों के विधायकों को खरीद रही है, और महाराष्ट्र प्रकरण के बाद सबके सामने आ गया है कि उसने विपक्ष के विधायकों को भारी पैसा खर्च करके खरीदा है। उन्होंने कहा कि भाजपा को जवाब देना चाहिए कि उसके पास यह पैसा कहां से आ रहा है। उन्होंने इस मामले के जांच की भी मांग की।

कई नेताओं पर झूठे आरोप लगा कर माफी मांग चुके हैं केजरीवाल

राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि वह उनकी सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश करती रही है। आरोप है कि सीबीआई-ईडी का प्रयोग कर केंद्र सरकार विपक्ष के नेताओं को डराने की कोशिश करती है और ऐसे ही नेताओं को अपने पाले में मिलाकर वह राज्यों में सत्ता में परिवर्तन करने में सफल रही है। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा और कुछ अन्य राज्यों में इस तरह के आरोप लग चुके हैं। झारखंड और राजस्थान के मामले में भी इस तरह की कोशिश करने के आरोप लग चुके हैं।

उन्होंने कहा कि इन हालात में आम आदमी पार्टी का आरोप पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। लेकिन आम आदमी पार्टी पर अरविंद केजरीवाल की मजबूत पकड़ और राज्य के मतदाताओ के बीच उनकी स्वीकार्यता के कारण ऐसी कोई कोशिश सफल होने की कोई संभावना नहीं है।

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सुनील पांडेय के मुताबिक, इस मुद्दे पर स्वयं अरविंद केजरीवाल की अपनी विश्वसनीयता भी बहुत सही नहीं रही है। अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत से लेकर अब तक वे शीला दीक्षित, अरूण जेटली और नितिन गडकरी जैसे बेदाग छवि के नेताओं पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। दिल्ली में शीला दीक्षित सरकार के पतन के पीछे उनके इन आरोपों की एक बड़ी भूमिका मानी जाती है। लेकिन जब इन्हीं मामलों में अरविंद केजरीवाल पर केस दर्ज होने लगे, तो बाद में वे किसी भी नेता के खिलाफ कोई सबूत नहीं पेश कर सके और उन्हें सभी नेताओं से माफी मांगनी पड़ी।

लेकिन इस पूरी बहस में उन्होंने गुजरात में चुनावी हवा तैयार करने में सफलता अवश्य पाई है और इसका उन्हें राजनीतिक लाभ भी मिल सकता है। इसलिए भाजपा के इन आरोपों में कुछ सच्चाई हो सकती है कि अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ऑपरेशन लोटस की बात कहकर मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

जनता समझ रही सच्चाई

दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि दिल्ली के साथ-साथ पूरे देश की जनता देख रही है कि अरविंद केजरीवाल सरकार के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और इन्हीं भ्रष्टाचार के मामलों में उसके पंजाब से लेकर दिल्ली तक के मंत्री जेल में हैं। उन्होंने कहा कि एक्साइज पॉलिसी में सब कुछ लिखित दस्तावेजों में है और नियमों में फेरबदल कर प्राइवेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा।

भाजपा नेता के मुताबिक, एक्साइज पॉलिसी में एक-एक बिंदु का बदलाव बताता है कि सरकार किस तरह प्राइवेट कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचा रही थी। पूरी कोशिश केवल इस बात के लिए की जा रही थी कि दिल्ली में शराब की खपत बढ़ जाए, जिससे कंपनियों को भारी मुनाफा हो और उनसे आम आदमी पार्टी पैसे वसूल सके। उन्होंने कहा कि शराब पीने की उम्र में कमी करना, ठेकों की संख्या बढ़ाकर दोगुनी कर देना, प्रतिबंधित एरिया में भी शराब की दुकानें खोलने की अनुमति देना और दिल्ली में ड्राइ डे की संख्या 21 से घटाकर तीन कर देना, बताता है कि सरकार केवल लोगों को शराब पिलाने पर तुल गई थी। उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली के लोगों पर बहुत गलत असर होता और इन सवालों के जवाब देने से मनीष सिसोदिया या आम आदमी पार्टी बच नहीं सकती।

नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि सरकार ने नियमों से उलट जाकर शराब निर्माता कंपनियों को भी दुकानें खोलने की अनुमति दे दी जो नियमों के पूरी तरह खिलाफ था। इसी प्रकार एक कंपनी को नियमों से उलट जाकर भारी मात्रा में दुकानें खोलने की अनुमति दी गई, जिससे कंपनियों को लाभ पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इन आरोपों पर विधायकों की खरीद करने का आरोप लगाकर पर्दा नहीं डाल सकती। उसे जनता को इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा कि वह गली-गली में शराब की दुकानें खुलवाकर दिल्ली के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों करना चाहती थी?

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