सैमसंग ने दुनिया के कई बड़े देशों को छोड़कर भारत में ही अपनी सबसे बड़ी फैक्ट्री लगाने की क्यों सोची, यह सबसे बड़ा सवाल है। इसके कई कारण हैं। एक तो यहां मोबाइल कंपनियों को अपनी फैक्ट्री लगाने में ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ती जबकि दूसरे देशों में इन कंपनियों को कई तरह की कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है और दूसरा ये कि वहां टैक्स की भी अधिकता होती है, श्रम लागत भी ज्यादा होती है और भारत की अपेक्षा वहां का मोबाइल बाजार भी काफी छोटा है।
भारत में विनिर्माण कंपनियों के लिए इसलिए फायदेमंद होता है क्योंकि यहां एक बड़ा घरेलू बाजार है। इसलिए वैश्विक निर्माता यहां जोखिम लेने के लिए भी तैयार रहते हैं। दूसरे देशों की अपेक्षा भारत उनके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यही कारण है कि कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने अपनी विनिर्माण इकाई भारत में खोला है।
इलेक्ट्रानिक्स दुनिया की दिग्गज कंपनी एलजी के प्रबंध निदेशक किम की वान का कहना है कि हमने महसूस किया है कि भारत में निवेश करने का यही सही समय है। यहां स्मार्टफोन्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।
वहीं, मोबाइल फोन कंपनी लावा के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन हरि ओम राय का कहना है कि दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण हब चीन में इंजीनियरिंग और श्रम की लागत लगातार बढ़ रही है और खपत भी कम है, जिसकी वजह से वहां फैक्ट्रियां खोलना अब आसान नहीं रह गया है। जबकि इसके विपरीत, भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां श्रम लागत बहुत ही कम है, खपत ज्यादा है और यहां प्रतिभावान सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की संख्या भी भारी मात्रा है, जो कंपनियों के लिए काफी फायदेमंद होता है।
इसके अलावा भारत में व्यवसाय करना काफी आसान है, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) तेजी से बढ़ रहा है, जीएसटी के तहत लाभकारी नीतियां हैं और इनकम टैक्स बहुत ही कम है। इसके अलावा यहां से मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों में उत्पादों का निर्यात भी काफी सुगम है। यहीं वे कारक हैं जिनकी वजह से मोबाइल कंपनियों ने यहां निवेश करना शुरू किया है और आज भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माण (मैन्यूफैक्चरिंग) हब बन चुका है।