फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जाते-जाते मोदी सरकार पर निशाना साध गए अंसारी, पहले भी कई बार दी थी नसीहत

Thu, 10 Aug 2017 04:21 PM IST
amarujala.com- Written by : हरेन्द्र सिंह मोरल
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्यसभा से अपनी विदाई पर अंतिम भाषण देते हुए निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपरोक्ष रूप से केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। एक दिन पहले ही राज्यसभा टीवी को दिए एक इंटरव्यू में भी हामिद अंसारी ने इस मुद्दे को उठाया था।
विज्ञापन


वरिष्ठ पत्रकार करन थापर के साथ बात करते हुए अंसारी ने कहा कि  देश के मुसलमानों में बेचैनी की भावना औैर असुरक्षा का बोध है। उन्होंने कहा कि देश में ‘स्वीकार्यता का माहौल’ खतरे में है। अंसारी ने यहां तक कहा कि उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और मंत्रिमंडल के उनके सहयोगियों के सामने भी असहिष्णुता के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा कि नागरिकों की भारतीयता पर सवाल किया जाना एक परेशानी पैदा करने वाली सोच है।

उन्होंने इंटरव्यू में पीट-पीट कर की जाने वाली हत्याओं, घर वापसी जैसे मामलों और तर्कवादियों की हत्याओं को भारतीय मूल्यों के खात्मे जैसा करार दिया। सरकारों पर निशाना साधते हुए अंसारी ने कहा, ये मामले ऐसे थे जिनसे लग रहा था कि अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग जगहों पर सामान्य कानून को लागू करने में शासन असमर्थ है।
विज्ञापन


दो दिन में दो बार सरकार पर अपरोक्ष हमले करते हुए अंसारी ने एक तरह से अपना विरोध तो प्रकट किया ही सरकार पर भी सवाल खड़ा कर दिया। ऐसा पहली बार नहीं है जब अंसारी खुलकर मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करते दिखे, बल्कि इससे पहले भी वह कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। आइए डालते हैं उनके पूर्व बयानों पर एक
निगाह।

अल्पसंख्यकों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना

राज्यसभा से जाने से तीन दिन पहले भी पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने असहिष्‍णुता और अल्पसंख्यकों पर हिंसा का मुद्दा उठाते हुए कहा ‌था कि देश के नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। बंगलुरू के नेशनल लॉ स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, राष्ट्रवाद का एक लिबरल रूप नहीं है। इस प्रकार का राष्ट्रवाद देश में असहिष्णुता और देशभक्ति के नाम पर घमंड़ फैलाता है। 

हिंसा होने पर विश्वविद्यालयों को दी थी चुप न रहने की नसीहत
सालभर पहले पंजाब यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में पहुंचे उप राष्ट्रपति ने कहा था कि हमारे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता को संकीर्ण विचारों के आधार पर चुनौती दी जा रही है और उसे जनहित में बताया जा रहा है। किसी के दृष्टिकोण को अपनाने के लिए कोई मजबूर नहीं है। किसी गैरकानूनी आचरण या हिंसा होने पर विश्वविद्यालय को खामोश नहीं रहना चाहिए। न ही उसके शिक्षकों या छात्रों को किसी दृष्टिकोण विशेष का समर्थन या खंडन करने के लिए प्रभावित करना चाहिए। विश्वविद्यालयों को अपनी सैद्धांतिक अखंडता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर कानूनी तरीका अपनाना चाहिए
विज्ञापन

सवाल उठाना भी मान लिया गया है असहिष्‍णुता

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी
पिछले साल जनवरी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा था कि समाज में सवाल उठाना तथा आलोचना करना भी एक तरह की असहिष्णुता मान ली गई है। स्थिति यह है कि अलग राय रखने वाले लोगों को या तो बहिष्कृत कर दिया जाता है या फिर उनकी हत्या हो जाती है। अंसारी ने उन्होंने अतार्किक आस्था तथा विश्वास पर भी चोट की।

नहीं हो रही अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा
वहीं नवंबर 2015 में पुणे इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उप राष्ट्रपति ने कहा था कि विविधता और असहमति के खिलाफ असहिष्णुता की प्रवृत्ति चिंताजनक है। अंसारी ने कहा कि भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा, समूह के अधिकारों के साथ-साथ व्यक्तिगत अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रावधान किए गए हैं, लेकिन अफसोस है कि फिलहाल उनके हितों की रक्षा नहीं की जा रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें