नगांव पुलिस थाने के बाहर हुआ प्रदर्शन
गोलीबारी की इस घटना के खिलाफ बोरा की मां और कुछ छात्रों ने नगांव पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन भी किया। ये लोग घटना में शामिल पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और मामले की न्यायिक जांच की मांग उठा रहे थे। पुलिस के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे कहा कि मुख्य द्वार को अवरोधित करने के स्थान पर अपनी मांगों को लेकर उन्हें एक ज्ञापन सौंपना चाहिए।
असम पुलिस ने ट्विटर पर दी प्रतिक्रिया
इसे लेकर प्रदर्शनों और आरोपों को लेकर असम पुलिस ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी है। इसने एक ट्वीट में लिखा, ' नगांव के कचलुखुआ में गोलीबारी की घटना में शामिल पुलिस कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से पुलिस रिजर्व में भेज दिया गया है। हमने सरकार से एक कमिश्नर स्तरीय जांच करवाने का अनुरोध किया है। अगर कोई गलती पाई जाती है तो उस पर कदम उठाए जाएंगे।'
पुलिस ने बताई कुछ ऐसे हुई थी घटना
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार नगांव पुलिस अधीक्षक आनंद मिश्रा ने कहा है कि मैं इस मामले की निजी स्तर पर जांच करूंगा और यह पता लगाऊंगा कि क्या यह मामला पुलिस की ज्यादती का है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में मुझे पता चला है कि पुलिस को इस बात की सूचना मिली थी कि कुछ बाइक सवार मादक पदार्थों की बिक्री कर रहे थे।
मिश्रा ने बताया कि जब दो पुलिसकर्मी सादी वेशभूषा में वहां पहुंचे तो इस पूर्व छात्र नेता ने उनसे पूछा कि क्या वह कानून प्रवर्तक हैं। जब उन्होंने इसके जवाब में हां कहा को आरोपी ने एक पर अपने हेलमेट से हमला कर दिया। पास ही में एक बैकअप पुलिस बल मौजूद था जो वहां पहुंचा और आरोपी को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन वह उनपर लगातार हमले करता रहा।
उन्होंने आगे कहा कि जब पुलिस के पास कोई चारा नहीं बचा तो उन्होंने उसके पैर पर गोली मारी। उसके पास से आठ शीशियां बरामद हुई हैं जिनमें हेरोइन थी। उधर, आरोपी को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत अब स्थिर है। बोरा के परिजनों, मित्रों और विपक्षी दलों ने इस हादसे को लेकर पुलिस के पक्ष को फर्जी करार दिया है।