पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जिंदगी पर बनी फिल्म 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' का ट्रेलर रिलीज होने के साथ ही राजनीतिक चर्चाओं में शुमार हो गया है। गुरुवार रात भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस फिल्म का एक तरह से प्रचार किया गया, जिसके बाद राजनीतिक गरमा गई है।
भाजपा के ट्विटर हैंडल से लिखा गया, "एक परिवार ने कैसे एक देश को दस साल तक गिरवी रखा, इसकी दिलचस्प कहानी! क्या डॉ. सिंह एक ऐसे नेता थे जो प्रधानमंत्री की कुर्सी वारिस के तैयार होने तक ही संभाल रहे थे? देखिए एक अंदर के शख्स के अनुभवों पर आधारित फिल्म 'द एक्सीडेंट प्राइम मिनिस्टर' का ट्रेलर, जो 11 जनवरी को रिलीज हो रही है।"
ये फिल्म पत्रकार संजय बारू की किताब पर आधारित है जो 2004 से 2008 के बीच मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार थे।
फिल्म के ट्रेलर के साथ मनमोहन सिंह के राजनीतिक करियर का विश्लेषण भी किया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मनमोहन सिंह को राजनीति में लाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को जाता है। 1991 में नरसिम्हा राव की राजनीतिक पारी का एक तरह से अंत हो गया था। रोजर्स रिमूवल कंपनी का ट्रक उनकी किताबों के 45 कार्टन लेकर हैदराबाद रवाना हो चुका था।
ये अलग बात है कि उनके एक नौकरशाह मित्र ने, जो शौकिया ज्योतिषी भी थे, उनसे कहा था, "इन किताबों को यहीं रहने दीजिए। मेरा मानना है कि आप वापस आ रहे हैं।"
विनय सीतापति अपनी किताब 'हाफ लायन- हाऊ पीवी नरसिम्हा राव ट्रांसफॉर्म्ड इंडिया' में लिखते हैं कि नरसिम्हा राव इस हद तक रिटायरमेंट मोड में चले गए थे कि उन्होंने दिल्ली के मशहूर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की सदस्यता के लिए आवेदन कर दिया था, ताकि अगर भविष्य में वो कभी कुछ दिनों के लिए दिल्ली आएं तो उन्हें रहने की दिक्कत न हो।
लेकिन तभी अचानक जैसे सब कुछ पलट गया। 21 मई, 1991को श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की हत्या हो गई। इस घटना के कुछ घंटों के भीतर जब बीबीसी के परवेज आलम ने उनसे नागपुर में संपर्क किया तो उनसे हुई बातचीत से इस बात का दूर दूर तक अंदाजा नहीं लगा कि अगले कुछ दिनों में वो भारत के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं।