केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार से जुड़े कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर एक हफ्ते के लिए रोक लगा दी है। इस फैसले का सीपीआई (एम) ने स्वागत किया है। पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कानून के शासन को मजबूती मिली है। वहीं, कांग्रेस ने कहा कि अदालत ने एफआईआर रद्द नहीं की है, इसलिए राज्य सरकार की कार्रवाई सही थी।
सीपीआई (एम) ने फैसले को बताया कानून के राज की जीत
सीपीआई (एम) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पार्टी के लिए राहत देने वाला है। पार्टी शुरू से ही इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताती रही है। गोविंदन ने कहा कि सीपीआई (एम) इस मामले का मुकाबला कानूनी और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर करेगी।
हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने का मिला मौका
गोविंदन के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि केरल हाईकोर्ट को विजयन और उनके परिवार के सदस्यों की अपील पर विचार करना चाहिए था। इस अपील में 9 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने विजयन और अन्य लोगों को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील करने की अनुमति दी है। जांच पर एक हफ्ते की रोक भी इसी कानूनी प्रक्रिया के लिए दी गई है।
'एफआईआर अब भी कायम है'
कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द नहीं की है। उनके मुताबिक, अदालत ने जांच पर रोक इसलिए लगाई है, ताकि विजयन और अन्य लोग अपनी अपील दाखिल कर सकें और हाईकोर्ट में अपना पक्ष रख सकें। चेन्नीथला ने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भेजे गए पत्र की जांच की गई और कानूनी सलाह लेने के बाद आगे की कार्रवाई की गई।
कानूनी सलाह के बाद दर्ज हुई एफआईआर
चेन्नीथला के अनुसार, ईडी ने विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और उनके पति पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग की थी। सरकार ने पहले मामले की शुरुआती जांच कराने का फैसला लिया और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्य सरकार का रुख सही साबित हुआ है।
हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी अपील
केरल हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर को विजयन, वीणा और रियास की अपील खारिज कर दी थी। इन लोगों ने 9 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एफआईआर दर्ज करने को कहा गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज होने से पहले आरोपी को अपनी बात रखने का कानूनी अधिकार नहीं है। इसके बाद मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया।
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ईडी ने लगाए 2.78 करोड़ रुपये के भुगतान के आरोप
इस मामले में विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट-1 ने विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की थीं। ईडी का आरोप है कि सीएमआरएल ने आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर वीणा की कंपनी 'एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस' को 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जबकि यह भुगतान कथित तौर पर फर्जी था। एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस अब बंद हो चुकी है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत अपनी जांच और तलाशी के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर मामला दर्ज करने की मांग की थी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली एक हफ्ते की रोक के बाद इस मामले में अगली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।