पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारतीय सशस्त्र बलों के ऑपरेशन सिंदूर का एक स्पष्ट राजनीतिक-सैन्य उद्देश्य था। नई दिल्ली को पता था कि मई, 2025 में चार दिनों तक चले इस संघर्ष को कैसे और कब समाप्त करना है।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने ऑपरेशन सिंदूर पर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों के इस अभियान का राजनीतिक-सैन्य उद्देश्य स्पष्ट था। भारत को अच्छी तरह पता था कि मई 2025 में चार दिनों तक चले इस संघर्ष को कब और कैसे समाप्त करना है।
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भारतीय सेना का ऑपरेशन 'सटीक और आनुपातिक'
जनरल नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक सेना प्रमुख रहे थे। मंगलवार को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से उचित जवाब दिया। मुंबई में टेलीविजन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के पुरस्कार समारोह में बोलते हुए पूर्व सेना प्रमुख ने इसे "दंडात्मक, सटीक और आनुपातिक" ऑपरेशन बताया। भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
पूर्व सेनाध्यक्ष की दो-टूक- युद्ध कोई बॉलीवुड फिल्म नहीं है
जनरल नरवणे ने कहा, मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि ऑपरेशन सिंदूर को अचानक क्यों रोक दिया गया। मैं जवाब देता हूं कि युद्ध कोई बॉलीवुड फिल्म नहीं है। युद्ध लड़ना आसान काम नहीं है। जब पाकिस्तान ने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा, तब भी हमारे पास पर्याप्त शक्ति थी और हम उसे और भी बुरी तरह हरा सकते थे। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। हमने संयम दिखाया।
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भारत का संयम और वैश्विक पहचान
पूर्व सेनाध्यक्ष ने सेना के शौर्य और पराक्रम के बीच संयम की अहमियत को भी रेखांकित किया। जनरल नरवणे ने कहा, हमारे द्वारा दिखाए गए संयम ने विश्व में हमारा कद बढ़ाया है। भारत को अब एक जिम्मेदार और स्थिर देश माना जाता है जो शांति की बात करता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करने से भी नहीं हिचकिचाता। यही अब हमारी पहचान है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैन्य कार्रवाई
ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। उस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। भारतीय सेना के इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए गए। इन हमलों में कम से कम 100 आतंकवादियों को मार गिराया गया। अभियान के विस्तार के साथ पड़ोसी देश की हवाई संपत्तियों को भी निशाना बनाया गया।