सुप्रीम कोर्ट ने वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) के साथ ईवीएम का उपयोग करके डाले गए सभी वोटों के सत्यापन की मांग वाली याचिकाओं पर बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। उम्मीद जताई जा रही थी कि अदालत आज अपना फैसला सुना देगी। हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारी से कुछ सवालों पर स्पष्टीकरण मांगने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट पर्चियों और ईवीएम के वोटों के 100 फीसदी मिलान की मांग वाली याचिकाओं पर बुधवार को उप चुनाव आयुक्त नितेश व्यास को कोर्ट में बुलाकर पांच मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा। कोर्ट ने कहा, हमने ईवीएम के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (एफएक्यू) देखे हैं। हम तीन-चार चीजों पर स्पष्टीकरण चाहते हैं। हम तथ्यात्मक रूप से गलत नहीं होना चाहते बल्कि अपने निर्णय में दोहरा सुनिश्चित होना चाहते हैं और इसलिए यह स्पष्टीकरण मांग रहे हैं। कोर्ट ने भाटी से व्यास को दोपहर बाद दो बजे बुलाने के लिए कहा। व्यास पहले शीर्ष कोर्ट के सामने ईवीएम को लेकर प्रेजेंटेशन दे चुके हैं।
सवाल : माइक्रोकंट्रोलर कंट्रोलिंग यूनिट में लगा होता है या वीवीपैट में। हमें लगा था कि यह कंट्रोलिंग यूनिट में होता है लेकिन एफएक्यू के एक सवाल के जवाब में कहा गया है कि यह वीवीपैट में भी होता है। कोर्ट को यह बताया गया था कि वीवीपैट में फ्लैश मेमोरी होती है।
जवाब : सभी तीन इकाइयों, कंट्रोल, मतदान और वीवीपीएटी के पास अपने स्वयं के माइक्रोकंट्रोलर हैं जो एक बार प्रोग्राम किए जा सकते हैं और यह प्रोग्राम माइक्रोकंट्रोलर की मेमोरी में ही लोड किए जाते हैं। ये माइक्रोकंट्रोलर सुरक्षित, अनधिकृत पहुंच पहचान वाले मॉड्यूल में रखे गए हैं, जिस तक शारीरिक रूप से नहीं पहुंचा जा सकता।
सवाल : क्या माइक्रोकंट्रोलर एक बार प्रोग्राम योग्य होता है? ऐसा इसलिए क्योंकि माइक्रोकंट्रोलर कई तरह के होते हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि माइक्रोकंट्रोलर एक बार प्रोग्राम योग्य होता है तो कृपया इसे दोबारा कन्फर्म करें।
जवाब : सभी माइक्रोकंट्रोलर एक बार प्रोग्राम योग्य हैं। यह प्रोग्राम इन्हें बनाते समय ही लोड किया जाता है। इसे बदला नहीं जा सकता या इन तक शारीरिक रूप से पहुंचा नहीं जा सकता।
सवाल : चुनाव आयोग के पास कितने सिंबल लोडिंग यूनिट्स हैं।
जवाब : ईवीएम के दो उत्पादक हैं, इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि.(ईसीआईएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (भेल)। ईसीआईएल के पास 1904 और भेल के पास 3154 यूनिट हैं।
सवाल : चुनाव के बाद ईवीएम को कितने दिन सुरक्षित रखा जाता है? चुनाव याचिका दायर करने की समय सीमा 45 दिन होने के कारण क्या इसे सुरक्षित रखने की अवधि 45 दिन से अधिक नहीं होनी चाहिए?
जवाब : मतगणना के बाद परिणाम को चुनौती देने की कानूनी अवधि 45 दिन है इसलिए ईवीएम को 45 दिन सुरक्षित रखा जाता है। 46वें दिन राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करते हैं कि क्या किसी सीट के चुनाव को चुनौती देने वाली कोई याचिका दायर की गई है। रजिस्ट्रार से लिखित जवाब मिलने के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी को उन स्ट्रांग रूम को खोलने के लिए कहते हैं जहां के लिए कोई याचिका दायर नहीं की गई हो। यदि किसी सीट पर याचिका दायर है तो वहां के ईवीएम को सील रूम में ही रखा जाता है।
सवाल : ईवीएम को सुरक्षित रखने के मामले में, क्या कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट दोनों पर सील लगाई जाती है? क्या वीवीपैट को भी मतदान यूनिट और कंट्रोल यूनिट के साथ संग्रहित किया जाता है?
जवाब : सबसे महत्वपूर्ण कंट्रोल यूनिट है इसलिए ईवीएम की जांच के पहले चरण में ही इसपर गुलाबी सील लगाई जाती है। ईवीएम के इस्तेमाल और मतदान खत्म होने के बाद मतदान यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट तीनों को सील किया जाता है। दूसरे चरण के रैंडम जांच के बाद तीनों को स्ट्रांग रूम में एक साथ एक यूनिट के रूप में स्टोर किया जाता है और मतदान के बाद हरा पेपर सील इस्तेमाल किया जाता है।