फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Assam: असम के नगांव में चला बेदखली अभियान, करीब 1500 परिवार हुए प्रभावित; आरक्षित वन की भूमि पर था अतिक्रमण

Sat, 29 Nov 2025 03:10 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

Eviction Drive In Assam: असम के नगांव जिले में प्रशासन की तरफ से बेदखली अभियान चलाया गया है। जानकारी के मुताबिक, इस अभियान से करीब 1500 परिवार प्रभावित हुए हैं। वहीं इस मामले में सरकार का कहना है कि आरक्षित वन की भूमि पर अतिक्रमण था।
विज्ञापन
असम में बेदखली अभियान (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

असम के नगांव जिले में शनिवार को एक बड़ा बेदखली अभियान शुरू किया गया। इस अभियान का उद्देश्य लगभग 795 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि को खाली कराना है, जहां करीब 1,500 परिवार वर्षों से रह रहे थे। सुबह से ही लुटीमारी इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह कार्रवाई शुरू हुई।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - महमूद मदनी पर भाजपा का पलटवार: पात्रा बोले- बयान भड़काऊ ही नहीं, बांटने वाला; सुप्रीम कोर्ट ले स्वत: संज्ञान

पहले ही जारी किया गया था नोटिस
अधिकारियों के अनुसार, प्रशासन ने तीन महीने पहले ही लोगों को नोटिस देकर इलाके खाली करने को कहा था। शुरुआत में दो महीने की समय सीमा दी गई थी। बाद में निवासियों के अनुरोध पर प्रशासन ने एक महीने का अतिरिक्त समय भी दिया।
विज्ञापन


1100 परिवारों ने पहले ही छोड़ दिया था घर
जानकारी के मुताबिक, अब तक 1100 से अधिक परिवार अपने घरों को खुद ही तोड़कर सामान लेकर हट चुके हैं। इनमें पक्के और कच्चे दोनों तरह के घर शामिल हैं। बाकी बचे घरों को प्रशासन की तरफ से हटाया जा रहा है।

लोगों का दावा- हम 40 साल से रह रहे हैं
कई हटाए गए परिवारों ने दावा किया कि वे इस इलाके में 40 साल से रह रहे थे, और उन्हें पता नहीं था कि यह जमीन आरक्षित वन क्षेत्र में आती है।

सरकार का रुख- वन भूमि वापस लो
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले ही बता चुके हैं कि मई 2021 में सत्ता में आने के बाद से अब तक 160 वर्ग किलोमीटर जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है। उनके अनुसार, अब तक ऐसे अभियानों में 50,000 से अधिक लोगों को हटाया गया है। जून में अभियान फिर शुरू होने के बाद से ही 5,000 से ज्यादा परिवार हटाए जा चुके हैं।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - Maharashtra: राज ठाकरे ने साधु ग्राम के लिए पेड़ों की कटाई का किया विरोध; कहा- सरकार आगे न बढ़ने दे विवाद

कौन हैं प्रभावित लोग?
अधिकारियों का कहना है कि यह वन भूमि है, लेकिन प्रभावितों में से कई बताते हैं कि वे बांग्ला-भाषी मुस्लिम समुदाय के हैं और उनके पूर्वजों ने यहां बसने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उनका दावा है कि वे असम के नदी किनारे बसे चर क्षेत्रों से आए थे, जो ब्रह्मपुत्र नदी में बार-बार कटाव से बह गए थे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें