तमिलनाडु के कोयंबटूर से एक चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चेन्नई के झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाली ज्यादातर महिलाएं यौन शोषण का शिकार हो चुकी हैं।
शहर के एनजीओ 'धागम फाउंडेशन' की रिपोर्ट के मुताबिक झुग्गियों में रहने वाली हर दूसरी महिला का यौन शोषण हुआ है। इससे भी ज्यादा चौकाने वाली बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यौन शोषण का कारण महिलाओं के ससुराल वाले हैं।
एनजीओ ने यह सर्वे बसंत नगर, रामापुरम, व्यासपर्दी, कैसीमेडू, सैदापेट और सीमेंचेरी की झुग्गियों झोपड़ियों में किया है। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई की केवल 10 फीसदी महिलाएं ही इस मामले से जुड़ी बातें किसी और को बता पाती हैं।
'पुलिस देती है चुप रहने की सलाह'
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सर्वे की रिपोर्ट पर मद्रास हाई कोर्ट के वकील और बाल अधिकारों से जुडे मामलों की पैरवी कर चुके वी. कन्नडासन ने कहा कि यह रिपोर्ट चेन्नई की वास्तविक तस्वीर को उजागर करती है।
उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में महिलाओं को चुप रहना पड़ता है। महिला के ससुराल वालें ही उनका यौन उत्पीड़न करते हैं इसलिए वह किसी से कुछ बोलने में भी डरती हैं।
वी. कन्नडासन ने बताया कि इन सबका कारण महिलाओं के बीच फैली अशिक्षा है। महिलाओं को अपने अधिकारों का ज्ञान नहीं है, यहां तक की महिला अधिकारों को लेकर तमिलनाडु की महिला पुलिस में भी जागरूकता की कमी हैं। कई मामलों में पीड़ित महिला को पुलिस से चुप रहने की सलाह दी जाती है।
ऑफिस में यौन उत्पीड़न के चलते छोड़नी पड़ी नौकरी
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रिपोर्ट में बताया गया है कि सर्वे में शामिल हर 5 महिलाओं में से एक की शादी 15 साल से कम उम्र में ही करा दी गई थी। 1000 महिलाओं पर हुए इस सर्वे में 400 महिलाएं ऐसी थी, जिनकी शादी 20 साल की उम्र से पहले कर दी गई। उनकी शादी उनकी उम्र से काफी बड़े आदमियों से की गई। सर्वे में शामिल 40 फीसदी महिलाओं ने बताया कि वो अपनी शादी से खुश नहीं थी, इसलिए अब वे अपने पतियों से अलग रह रही हैं।
शिक्षा को लेकर भी रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं वह आश्चर्यजनक है। सर्वे में पता चला की मात्र 2 फीसदी महिलाएं ही ऐसी हैं जिन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ज्यादातर महिलाओं को प्राइमरी के बाद ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
कुछ महिलाओं का कहना था कि उन्हें पढ़ाई इसलिए छोड़नी पड़ी, क्योंकि उनके पास पीरियड्स के दौरान कॉलेज जाने के लिए सैनिट्री नैपकिन नहीं थें। जिन महिलाओं ने अपनी शिक्षा पूरी की उन्हें भी ऑफिस में यौन प्रताड़ना और लैंगिक भेदभाव के चलते नौकरी छोड़नी पड़ी।