यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में पत्रकार प्रशांत कनौजिया के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कभी-कभी अदालत को भी सोशल मीडिया का दंश झेलना पड़ता है। कभी यह उचित होता है और कभी अनुचित, लेकिन हमें अपने अधिकारों का पालन करते रहना होता है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ आपत्तिजनक मीम शेयर करने गिरफ्तार की गई भाजपा की यूथ नेता प्रियंका शर्मा के मामले को अलग बताया। पीठ ने 14 मई को प्रियंका को जमानत देते हुए लिखित में माफी मांगने का आदेश दिया था। पीठ ने कहा कि प्रियंका शर्मा के मामले में हमने पाया कि ज्यादातर पोस्ट (मीम) बेहद आपत्तिजनक थे। ऐसे में दूसरों के अधिकार में हस्तक्षेप करने पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है।
प्रशांत कनौजिया की पत्नी जगीशा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संविधान में विश्वास और मजबूत हुआ है। पुलिस ने गैरकानूनी तरीके से मेरे पति को गिरफ्तार किया था। हमने सांविधानिक तरीके से सभी प्रक्रियाओं का पालन किया और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मेरे पति ने हल्के फुल्के अंदाज में ट्वीट किया था और इसमें कुछ भी अनुचित नहीं था।