घाटी में रमजान के बाद भी आतंकियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सशर्त विराम दिया जा सकता है। इस संबंध में गृहमंत्री राजनाथ सिंह की दो दिन की जम्मू-कश्मीर यात्रा के बाद सेना, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए), वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा और अर्धसैनिक बलों के महानिदेशकों के साथ बातचीत का दौर शुरू हो गया है। घाटी में विश्वास बहाली के उपाय (सीबीएम) के तहत इसे फिलहाल अमरनाथ यात्रा तक बढ़ाए जाने की सैद्धांतिक सहमति मिली है। अंतिम फैसला 15-16 जून को ईद के बाद किया जाएगा।
गृह मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, गृहमंत्री राजनाथ सिंह दिनेश्वर शर्मा की राय से सहमत हैं कि कश्मीर में राजनीतिक स्तर की बातचीत की शुरुआत के लिए अनुकूल माहौल होना और केंद्र के प्रति आम लोगों का विश्वास कायम करना जरूरी है। सूत्रों ने बताया कि सैन्य कार्रवाई को विराम देने का आम लोगों में अच्छा संदेश गया है। गृहमंत्री नेे इन बिंदुओं की व्यक्तिगत तौर पर समीक्षा की है। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी केंद्र से इस विराम को आगे बढ़ाने की गुजारिश की है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की रिपोर्ट है कि आतंकवादी गुटों की तरफ आकर्षित होने वाले युवकों में भी यह संदेश गया है कि सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद वे सुरक्षा बल की गोलियों का शिकार हो जाएंगे। युवकों को इस ओर जाने से रोकने के लिए वहां के मौलवियों और परिवार वालों को नए सिरे से विश्वास में लिया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य कार्रवाई थमने के बाद युवकों के आतंकी बनने की घटनाओं में भी भारी कमी आई है।
सूत्रों ने बताया कि अलगाववादी तत्व घाटी में भी अलग थलग पड़ते जा रहे हैं। दूसरी सकारात्मक बात है कि सीमा पर भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच सीजफायर करार पर हुई सहमति भी अच्छे संकेत हैं। इस लिहाज से अगले एक हफ्ते में कश्मीर को लेकर कुछ बड़े अहम फैसले हो सकते हैं।