सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाली पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेसिया) और लिविंग विल (इच्छामृत्यु की वसीयत) को कुछ शर्तों के साथ अनुमति प्रदान कर दी है।
इच्छामृत्यु को अनुमति देने के बाद कोर्ट ने कहा कि मनुष्य को सम्मान के साथ मरने का अधिकार है। इसके बाद इच्छामृत्यु की मांग करने वाले लोगों ने इस फैसले को सही बताया है।
अनामिका मिश्रा ने कोर्ट के इस फैसले की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि वह 2014 में इच्छामृत्यु की मांग कर चुकी हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने इस बारे में संज्ञान लिया और स्थानीय अधिकारियों को मामले में जांच के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट का अच्छा फैसला है। अनामिका मिश्रा मसकुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित हैं। उन्हें उम्मीद है कि अब वह स्वेच्छा से दुनिया को अलविदा कह सकेंगी।
वहीं लावाते दंपति ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष से अधिक लोगों को यह अधिकार दिया जाना चाहिए। अब ऐसे लोग डॉक्टर और पुलिस से पुष्टि कर सकते हैं। वहीं इस फैसले के बाद लक्ष्मी यादव ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण फैसला है। यह उन लोगों के लिए बहुत ही सही फैसला है जो लोग स्वेच्छा से शांति और इज्जत के साथ मरना चाहते हैं। बता दें कि लक्ष्मी यादव ने प्रधानमंत्री और और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग की थी।