प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को एर्नाकुलम-केएसआर बंगलूरू वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन दक्षिण भारत की तीन महत्वपूर्ण राज्यों, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक, को जोड़ने वाली पहली इंटर-स्टेट सेमी-हाई स्पीड प्रीमियम ट्रेन है।
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सफर अब होगा तेज और आरामदायक
यह आठ कोच वाली ट्रेन एर्नाकुलम से चलकर त्रिशूर, पलक्कड़, कोयंबटूर, तिरुपुर, इरोड, सलेम होते हुए कृष्णराजपुरम और अंत में केएसआर बंगलूरू पहुंचेगी। पहले जहां एर्नाकुलम से बंगलूरू की यात्रा में करीब 11 घंटे लगते थे, वहीं नई वंदे भारत एक्सप्रेस यह दूरी केवल आठ घंटे 40 मिनट में तय करेगी।
सेवा की शुरुआत और समय-सारिणी
इस ट्रेन की नियमित सेवा 9 नवंबर 2025 से शुरू होगी। बंगलूरू से यह रोजाना (बुधवार को छोड़कर) सुबह 5:10 बजे चलेगी और दोपहर 1:50 बजे एर्नाकुलम पहुंचेगी। जबकि वापसी में यह एर्नाकुलम से 2:20 बजे रवाना होकर रात 11 बजे बंगलूरू पहुंचेगी।
व्यापार, शिक्षा और पर्यटन को बढ़ावा
दक्षिण रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन तीनों राज्यों के बीच व्यापार, शिक्षा, पर्यटन, तीर्थयात्रा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी सुविधा साबित होगी। यह ट्रेन पलक्कड़, जिसे केरल का प्रवेश द्वार कहा जाता है, तक पहुंचने वाली पहली वंदे भारत सेवा होगी।
यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं
वंदे भारत ट्रेन में यात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा अनुभव के लिए आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इसमें जीपीएस आधारित इंफोटेनमेंट सिस्टम, बायो-वैक्यूम टॉयलेट, एर्गोनोमिक सीटें, ऑटोमेटिक दरवाजे, रीडिंग लाइट्स और वाई-फाई सुविधा शामिल हैं।
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दक्षिण भारत के लिए नई रफ्तार
वर्तमान में देशभर में 130 से अधिक वंदे भारत सेवाएं संचालित हो रही हैं, जो भारत के कई हिस्सों को तेजी से जोड़ रही हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह नई ट्रेन आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से तीनों राज्यों को और करीब लाएगी।