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सुप्रीम कोर्ट ने कहा: पद और वेतनमान का निर्धारण कार्यपालिका का कार्य. न्यायपालिका का नहीं

Sat, 29 Jan 2022 10:25 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीठ ने कहा कि पद और वेतनमान के निर्धारण के इस तरह के कार्य को विशेषज्ञ निकाय पर छोड़ना समझदारी है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पद और वेतनमान का निर्धारण कार्यपालिका का प्राथमिक कार्य है न कि न्यायपालिका का। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि पद और वेतनमान के निर्धारण के इस तरह के कार्य को विशेषज्ञ निकाय पर छोड़ना समझदारी है। पद और वेतनमान का निर्धारण कार्यपालिका का प्राथमिक कार्य है न कि न्यायपालिका का और इसलिए आमतौर पर अदालतें नौकरी के मूल्यांकन के मामले में दखल नहीं देगी जो आमतौर पर विशेषज्ञ निकायों जैसे वेतन आयोगों के लिए छोड़ दिया जाता है।

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बेंच ने कहा, ऐसा इसलिए है क्योंकि इस तरह के नौकरी मूल्यांकन में विभिन्न कारक शामिल हो सकते हैं, जिसमें कर्मचारियों के विभिन्न समूहों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए प्रासंगिक डेटा और पैमाने शामिल हैं। इस तरह का मूल्यांकन वित्तीय प्रभाव डालने के अलावा कठिन और समय लेने वाला दोनों होगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए ठोस सामग्री नहीं है कि किसी पद के लिए वेतनमान तय करते समय गंभीर त्रुटि हुई है और अन्याय को दूर करने के लिए अदालत का हस्तक्षेप बेहद जरूरी है, अदालतें इस तरह के जटिल मुद्दों में हस्तक्षेप न करें।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणियां आईं, जिसमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) के रूप में कार्यरत एक व्यक्ति के पेंशन में संशोधन की मांग करने वाली याचिका की अनुमति दी गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने रिट याचिका के साथ-साथ समीक्षा याचिका में पारित आदेशों में समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत को लागू करके खुद को पूरी तरह से गलत दिशा दी है।

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