सार
केंद्र सरकार ने पर्यावरण नियमों में बड़ा सुधार करते हुए 'पर्यावरण ऑडिट नियम, 2025' अधिसूचित किए हैं। 29 अगस्त को जारी इन नियमों में वैश्विक मानकों को शामिल किया गया है, जिससे अनुपालन में पारदर्शिता बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
व्यवसाय सुगमता के लिए अपनी प्रतिबद्धता और विश्वास-आधारित शासन के सिद्धांतों के अनुरूप केंद्र सरकार ने पर्यावरण नियमों के अनुपालन की दिशा में बड़ा सुधार किया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय ने पर्यावरण ऑडिट नियम, 2025 की अधिसूचना जारी कर दी है।
29 अगस्त को जारी की गई अधिसूचना में पर्यावरण नियमों के मामले में सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए नियमों को अधिसूचित किया गया है और इनके जरिए पर्यावरण नियमों की मौजूदा कमियों को दूर किया गया है।
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मौजूदा पर्यावरणीय ढांचे के तहत निगरानी और अनुपालन का पूरा काम, अभी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालयों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण समितियों के हाथों में है। इन्हें जनशक्ति, संसाधनों, क्षमता और बुनियादी ढांचे के संदर्भ में महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
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क्या है इसका उद्देश्य?
इसका उद्देश्य निगरानी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही व विश्वसनीयता सुनिश्चित करने, हितधारकों के बीच विश्वास बढ़ाने और स्थायी पर्यावरणीय शासन को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है। नए नियमोॊ के तहत ऑडिटर्स (ईए) को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से अधिसूचित पर्यावरण ऑडिट डेजिग्नेट एजेंसी (ईएडीए) प्रमाणित और पंजीकृत करेगी। ईएडीए ही ईए के प्रमाणन और पंजीकरण, उनके प्रदर्शन की निगरानी, अनुशासनात्मक कार्रवाई, क्षमता निर्माण में सहायता और ऑनलाइन रजिस्टर के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगी।