कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी
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शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सोमवार को महिलाओं के लिए शादी की कानूनी उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने के विधेयक पर गठित संसदीय पैनल में एकमात्र महिला सांसद को शामिल किए जाने पर कड़ा विरोध जताया। महाराष्ट्र से सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को लिखे एक पत्र में कहा कि यह निराशाजनक है कि महिलाओं और भारतीय समाज से संबंधित एक विधेयक पर विचार के लिए गठित समिति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अत्यधिक कम है।
कनिमोझी ने भी जताई नाराजगी
द्रमुक नेता और लोकसभा सदस्य कनिमोझी ने भी पैनल में महिलाओं के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, कुल 110 महिला सांसद हैं, लेकिन सरकार देश की हर युवा महिला को प्रभावित करने वाले विधेयक पर विचार के लिए जो समिति बनाती है उसमें 30 पुरुष और केवल एक महिला है। पुरुष महिलाओं के अधिकारों का फैसला करना जारी रखेंगे और महिलाएं मूकदर्शक बनी रहेंगी।
पैनल में सुष्मिता देव एकमात्र महिला सांसद
शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल संबंधी विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति में महिलाओं के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने वेंकैया नायडू से बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक पर चर्चा में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। विधेयक पर विचार कर रही संसदीय समिति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद सुष्मिता देव के साथ 31 सदस्य हैं जो पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद हैं, जो अकेली महिला हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने नायडू को लिखे अपने पत्र में कहा, मैं आपसे यह सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हूं कि भारत में महिलाओं के सामने आने वाले मुद्दों से संबंधित विधेयक पर चर्चा में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व और भागीदारी होनी चाहिए। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि सभी हितधारकों के हितों को ध्यान में रखा जाए और सभी की आवाज, विशेष रूप से महिलाओं की आवाज समिति द्वारा सुनी और समझी जाए।