राजस्थान में 70 से 80 डिग्री का मोड़
राजस्थान के नागौर जिले में बीकानेर रोड रेलवे ओवरब्रिज पर 70 से 80 डिग्री के दो खतरनाक मोड़ हैं। बीते साल जनवरी में एक एसिड टैंकर पलट गया था और पांच बाइक सवारों की मौत हो गई थी। वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो इतने तीव्र मोड़ पर वाहन का संतुलन बिगड़ना तय है और बिना सही ढलान के ऐसे पुल बेहद असुरक्षित होते हैं। इंजीनियरों का कहना है कि इस पुल में मोड़ पर 'सुपर एलिवेशन' यानी गाड़ियों को संतुलित रखने वाली ढलान नहीं दी गई। इससे वाहन एक तरफ झुक जाते हैं। जिसके चलते वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।
बाड़मेर में चौड़ाई कम, मोड़ ज्यादा खतरनाक
एक ऐसा ही खतरनाक पुल राजस्थान के बाड़मेर जिले में भी है। बाड़मेर के चौहटन रोड पर बना ओवरब्रिज भी इंजीनियरिंग की बड़ी लापरवाही का उदाहरण है। इसे कम से कम 10 मीटर चौड़ा होना था, लेकिन 7.4 मीटर में ही बना दिया गया। साथ ही, चढ़ाई और ढलान वाले हिस्से में घुमावदार मोड़ देने की बजाय सीधा 90 डिग्री का तीव्र मोड़ दे दिया गया। इंजीनियर मानते हैं कि कम चौड़ाई और इतने तीव्र मोड़ पर बड़े वाहनों का निकलना बेहद मुश्किल होता है। यह स्थान हादसों का 'हॉटस्पॉट' बन चुका है।
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एक ब्रिज पर तीन-तीन ब्लाइंड स्पॉट
गुजरात के सुरेंद्रनगर में एक ब्रिज पर 45 और 90 डिग्री के ऐसे तीखे मोड़ हैं कि वहां तीन बड़े ब्लाइंड स्पॉट बन गए हैं। इंजीनियरों के अनुसार, चढ़ाई-उतराई के दौरान 45 डिग्री का मोड़ है, जहां भारी वाहनों के मोड़ लेते समय आगे का दृश्य बाधित होता है। वहीं, ब्रिज के बीचों-बीच दोनों तरफ 90-90 डिग्री के मोड़ हैं। इसी कारण एक छात्रा की जान जा चुकी है। वैज्ञानिक तौर पर जब मोड़ इतने तीखे होते हैं तो ड्राइवर को सामने का दृश्य साफ नहीं दिखता, जिससे हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
लखनऊ में पुल निर्माण में मकान बना बाधा
- फोटो : अमर उजाला वीडियो ग्रैब
पुल के बीच अटक गया मकान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में केसरीखेड़ा- कृष्णानगर को जोड़ने वाला ओवरब्रिज सिर्फ एक मकान की वजह से आठ महीने से अधर में लटका है। 74 करोड़ की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट बढ़ती लागत के कारण अब 84 करोड़ पर पहुंच चुका है। स्थानीय लोग ट्रैफिक जाम से परेशान हैं। सवाल ये है कि क्या पुल के बीच मकान आने से बचा जा सकता था? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि शुरुआती डिजाइनिंग में साफ प्लानिंग न होने से ऐसी स्थितियां बनती हैं। एलडीए सिर्फ नोटिस चस्पा करता है, पर मकान हटाने की ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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फ्लाइओवर से कनेक्शन में इतने फीट का फर्क
मुंबई के अंधेरी इलाके में गोखले ब्रिज को दोबारा बनाने में 90 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसे एक फ्लाइओवर से जोड़ना था, लेकिन दोनों की ऊंचाई में छह फीट का फर्क रह गया। नतीजा, बीएमसी की जमकर किरकिरी हुई। ये ब्रिज 2018 में हादसे के बाद बंद कर दिया गया था। दो लोगों की मौत और तीन घायल हुए थे। अब इसे 11 मई 2025 तक पूरी तरह शुरू करने का दावा किया गया है। हालांकि, इंजीनियरिंग की ये चूक फिर से लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है।
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