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ED: घर खरीदने वाले लोगों से जुटाए 522.90 करोड़ रुपये, फिर हुआ खेला, फ्लैट की बजाए कहीं ओर लगा दिया पैसा

सार

प्रवर्तन निदेशालय ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कई स्थानों पर छापेमारी की। धन शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत की गई इस कार्रवाई के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ईडी के मुताबिक प्रमोटर ने घर खरीदने वाले लोगों से 522.90 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद फ्लैट के बदले पैसे कहीं और लगा दिए गए।
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ED - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), लखनऊ जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मेसर्स उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड और अन्य के मामले में आगरा, मेरठ, नोएडा और दिल्ली में 8 स्थानों पर छापेमारी की है। दो दिन पहले हुई इस रेड में कई खुलासे हुए हैं। प्रमोटर अनिल मिठास को ईडी की सात दिन की हिरासत में भेजा गया है। आरोप है कि प्रमोटर ने घर खरीदने वाले लोगों से 522.90 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए। वे लोग इंतजार कर रहे थे कि अब उनका घर खरीदने का सपना साकार होने जा रहा है। जैसे ही उन्हें मालूम पड़ा कि कंपनी ने उनके साथ 'खेला' यानी धोखा कर दिया है तो उनका सपना टूट गया। कंपनी ने उन लोगों का पैसा फ्लैट बनाने की बजाए कहीं दूसरी जगह लगा दिया। घर खरीद की चाह रखने वाले लोगों ने जब अपना पैसा वापस मांगा तो उन्हें टरकाने का प्रयास किया गया।

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जांच एजेंसी ने कथित धोखाधड़ी के किंगपिन अनिल मिठास को हिरासत में ले लिया है। धन की हेराफेरी में शामिल उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड और उसके निदेशक अनिल मिठास एवं अन्य संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारियों के आवासों और कार्यालय परिसरों में तलाशी ली गई। ईडी की रेड का मकसद, अपराध की आय (पीओसी) और अपराध से संबंधित सबूतों का पता लगाना  था। ईडी ने यूपी पुलिस और ईओडब्ल्यू दिल्ली द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मेसर्स उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड, प्रमोटरों और अन्य के खिलाफ दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। ईडी की जांच से पता चला है कि उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड (इसके बाद 'यूएफएचएल' के रूप में संदर्भित) ने नोएडा के सेक्टर-119 में 'अरण्य' शैली में एक आवासीय और वाणिज्यिक परियोजना के लिए होमबॉयर्स से 522.90 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। प्रमोटर द्वारा उक्त राशि वर्ष 2012-2019 के दौरान एकत्र की गई थी।

कंपनी ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि सभी प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे। लोगों को तय अवधि में घर/फ्लैट मिल जाएंगे। हालांकि, यह परियोजना निर्धारित तिथि और समय पर पूरी नहीं हुई। घर खरीदारों को लगा कि उनके साथ धोखा हो गया है। उन्होंने विभिन्न फोरम जैसे यूपी-रेरा, पुलिस आदि में शिकायतें दर्ज करना शुरू कर दिया। इस बीच, कंपनी ने विभिन्न वित्तीय लेनदारों को बकाया चुकाने में भी चूक की। ऐसे ही एक वित्तीय लेनदार ने 2018 में एनसीएलटी, दिल्ली के समक्ष दिवालियेपन आवेदन दायर किया और वह आज तक लंबित है। इस प्रक्रिया ने होमबॉयर्स पर अतिरिक्त लागत का बोझ भी डाला गया।
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जांच के दौरान, यह पता चला है कि अनिल मिठास ने कंपनी के प्रमोटर होने के नाते विभिन्न संबंधित संस्थाओं और फर्जी कंपनियों में भारी मात्रा में धनराशि का निवेश कर दिया। इसके लिए लोगों के पैसे का गबन किया गया। लोगों से जिस कार्य के लिए पैसा लिया गया था, वहां पैसा नहीं लगाया गया।

वह पैसा ऐसी जगह पर लगाया गया, जो व्यवसायिक गतिविधियों से संबंधित नहीं था। जानबूझ ऐसी कंपनी में पैसा निवेश किया गया, जो बंद हो चुकी थी।

धनराशि को फर्जी ऋण और अग्रिम, शेयर प्रीमियम, सामग्री के लिए अग्रिम भुगतान, जमा आदि के जरिए विभिन्न कंपनियों में डायवर्ट/हस्तक्षेप किया गया। इसके चलते छोटे उल्लंघनों के कारण वह राशि जब्त कर ली गई या एमसीए से हटा दी गई। नतीजा, मूल परियोजना के लिए पैसे की कमी पड़ गई। वहां पर काम बंद हो गया। प्रोजेक्ट अटक गए। यूपीआरईआरए के निर्देश पर मेसर्स करी एंड ब्राउन द्वारा तैयार की गई ऑडिट रिपोर्ट और आईआरपी के निर्देश पर मेसर्स बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा तैयार की गई एक अन्य लेनदेन ऑडिट रिपोर्ट से स्पष्ट रूप से पता चला कि घर खरीदने वालों के धन का डायवर्जन/गबन फ्लैटों के निर्माण और विकास के मूल उद्देश्य के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया था।

निदेशकों और प्रमोटरों ने आईपीसी की धारा 420 और 120-बी के तहत संगठित वित्तीय धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रची। वे खरीदारों के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहे। उन्होंने कई परिवारों को वित्तीय नुकसान पहुंचाते हुए उनके विश्वास को तोड़ दिया। सैकड़ों घर खरीदारों को परेशानी में छोड़ दिया गया। समय पर उन्हें न तो घर मिल सका और न ही पैसा वापस हो सका। प्रमोटरों द्वारा भारी मात्रा में धन डायवर्ट किया गया। इस प्रकार, धोखाधड़ी का अपराध करके, जो एक अनुसूचित अपराध है, आरोपियों ने पैसा कमाया है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, यह अपराध की आय के अलावा कुछ भी नहीं है। ईडी ने आरोपियों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने और कंपनी मेसर्स यूएफएचएल द्वारा प्रमोटर अनिल मिठास के माध्यम से निकाले गए और डायवर्ट किए गए पीओसी का पता लगाने के लिए, पीएमएलए की धारा 17 के तहत घर खरीदारों के फंड के डायवर्जन से जुड़े विभिन्न परिसरों में तलाशी ली गई। बिक्री विलेख/निवेश विवरण के रूप में विभिन्न डिजिटल और साथ ही कई अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी द्वारा इसका विश्लेषण किया जा रहा है। 

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